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ज़िन्दगी से जो मिला, हमको गवारा हो गया (ग़ज़ल)

2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी से जो मिला हमको गवारा हो गया
कुछ गिला-शिकवा किये बिन ही गुज़ारा हो गया

टूटकर ख़ुद पूर्ण करता है जो औरों की मुराद
मेह्रबानी से किसी की मैं वो तारा हो गया

सत्य-अहिंसा साथ लेकर हम भटकते ही रहे
फ़ोटो से बापू की, उसका काम सारा हो गया

कल तलक जो मेरे सीने में धड़कता था,वो दिल
आज ये ऐलान करता हूँ, तुम्हारा हो गया

क़ैद कर दो प्रेम को इतिहास के पन्नों में अब
आजकल के प्रेमियों को 'काम' प्यारा हो गया

मिल गया तनहाई में जब शाइरी का संग "जय"
डूबते को एक तिनके का सहारा हो गया
================================

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 514

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Comment by जयनित कुमार मेहता on May 12, 2016 at 6:49am
आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी, हार्दिक धन्यवाद आपको।।
Comment by जयनित कुमार मेहता on May 9, 2016 at 1:54pm
आ. सतविंद्र कुमार जी,आभारी हूँ आपका!
Comment by जयनित कुमार मेहता on May 9, 2016 at 1:51pm
आ. समर कबीर जी, सुखननवाज़ी के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका।
Comment by gumnaam pithoragarhi on May 9, 2016 at 6:53am

अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 7, 2016 at 11:13pm
बेहतरीन ग़ज़ल हुई है आदरणीय जयनित कुमार जी।जार्दिक बधाई।
Comment by Samar kabeer on May 7, 2016 at 6:35pm
जनाब जयनित कुमार जी आदाब,बढ़िया ग़ज़ल हुई,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।

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