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फिर आओ गोपाल [ दोहा गीत जन्माष्टमी पर ]

 

हे पार्थ के सारथी, हे जसुमति के लाल

हरने जन की पीर अब , फिर आओ  गोपाल

 

ध्वस्त किया था कंस का ,इक दिन तुमने मान

निडर हो गया कंस अब ,और हुआ बलवान

घूम रहा है ओढ़ कर ,सज्जनता की खाल

हरने जन की पीर अब ,  फिर आओ  गोपाल

 

पाँचाली के चीर का ,किया खूब विस्तार   

नयनों में भर नीर फिर ,तुमको रही पुकार

अंध सभा में ठोकता , दुःशासन फिर  ताल

हरने जन की पीर अब  ,फिर आओ गोपाल

 

अर्जुन का रथ थाम कर ,दिया कर्म सन्देश

पाँसे अब है फेंकता ,शकुनि बदल कर वेश

हरे गेरुए मोहरे , जमी द्यूत  चौपाल

हरने जन की पीर अब   ,फिर आओ गोपाल

 

मौलिक व् अप्रकाशित  

 

    

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Comment by pratibha pande on September 19, 2016 at 7:37pm

 हार्दिक आभार आदरणीया अलका चंगा जी 

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on September 9, 2016 at 8:15pm

बेहद खूसूरत दोहा गीत .आदरणीया प्रतिभा पांडे जी ..जय श्री कृष्णा 

Comment by pratibha pande on September 3, 2016 at 1:21pm

  हार्दिक आभार आदरणीय सुरेश जी 

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on August 29, 2016 at 6:28pm
आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सुन्दर दोहा रचना के लिए हार्दिक बधाई ।
Comment by pratibha pande on August 27, 2016 at 6:39pm

  प्रयास पर आकर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी ...सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 26, 2016 at 8:33pm

बढ़िया दोहे ============= वाह

Comment by pratibha pande on August 26, 2016 at 8:51am

  प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी ..सादर 

Comment by pratibha pande on August 25, 2016 at 6:18pm

जी आदरणीय गिरिराज जी , आपका सुझाव उत्तम है ,परिमार्जन हेतु प्रस्तुत करती हूँ , इसी प्रकार उत्साह बढ़ाते रहिएगा ..आपका हार्दिक आभार ...सादर 

Comment by pratibha pande on August 25, 2016 at 6:15pm

आपको ये प्रयास अच्छा लगा मेरा लिखना सफल हुआ ,आका हार्दिक आभार आदरणीया राजेश जी 

Comment by pratibha pande on August 25, 2016 at 6:13pm

 आदरणीय मनन कुमार जी , सराहना  के लिए आपका हार्दिक आभार 

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