For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुण्डलिया छंद

नर-नारी-पशु-खग-विटप, हुए सभी बेहाल।
यू पी और बिहार में, हुई बाढ़ विकराल।।
हुई बाढ़ विकराल, काल सम बढती नदियाँ।
डूबे हर घर-बाग-खेत सब डूबी गलियाँ।।
प्रलय रूप धर आज, प्रकृति ज्यों उतरी भू पर।
ये उसका प्रतिशोध, विचारोगे कब हे! नर?

छप्पय छंद

कहीं बाढ़ विकराल, कहीं नर जल को तरसें।
कहीं सूखते खेत, कहीं घन अतिशय बरसें।।
कैसा है यह रूप, प्रकृति का कहा न जाए।
दोषी नर ही स्वयं, तभी तो दुख अति पाए।
नर नित्य प्रकृति का कर रहा, दोहन निज अनुसार है।
भूकम्प-बाढ़ के रूप में, कुपित प्रकृति की मार है।

रचना-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 244

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 1, 2016 at 9:22pm
वाह बहुत सुन्दर लिखा आपने ।
Comment by रामबली गुप्ता on August 31, 2016 at 10:45am
हृदयतल से आभार आद० गोपाल नारायण जी आपके सुझावों से कविता को और भी निखरने का अवसर प्राप्त होता है। आपके सुझावों के अनुरूप ' बढ़ी बाढ़ विकराल' को 'हुई बाढ़ विकराल' कर लिया है तथा 'सुरसरि' के स्थान पर 'नदियाँ' कर लिया है। पुनः देख लीजियेगा। पुनश्च आभार
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 30, 2016 at 8:07pm

आ० रामबली जी आप उन रचनाकारों में है जिन्हें पढने की इच्छा होती है , कुण्डलिया में  बढ़ी  बाढ़ का क्या अर्थ है बाढ़  तो बढ़ने से ही बना है , दूसरी बात सुरसरि की प्रतिष्ठा उसके मोक्षदायिनी स्वरुप से है उसे काल सम दर्शाना मेरी समझ में  संस्कृति की संगति  में नहीं है  . छप्पय का प्रारंभ बहुत अच्छा है आगे श्रम में कुछ कमी  मुझे लगती है हो सकता है ऐसा न हो . सादर .

Comment by रामबली गुप्ता on August 29, 2016 at 10:47pm
हृदय से आभार आद० सुरेश कुमार जी
Comment by रामबली गुप्ता on August 29, 2016 at 10:46pm
हृदय से आभार आद समर कबीर साहेब
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on August 29, 2016 at 5:36pm
आदरणीय श्री राम बली गुप्ता जी सुन्दर छंद रचना पर हार्दिक बधाई प्रेषित है । सादर ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2016 at 2:45pm
जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बाढ़ से हुई तबाही पर बहुत बढ़िया कुण्डलिया छन्द हुए हैं,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
3 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

क्यों कर्तव्य निभाएँ हम ?

शब्दों का है खेल निरालाआओ हम खिलवाड़ करेंगढ़ आदर्श वाक्य रचनाएँक्यों उन पर हम अमल करें ?दूजों को…See More
4 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार मैं इस गजल पर दोबारा काम करूंगा क्योंकि इसमें कई गलतियां दिख गई…"
6 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार इस गजल पर एक मित्र ने यह कहा है कि इसमें कुछ मिसरों मैं मात्रा…"
6 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ख्वाब के दो खत -एक नज़्म
"आदरणीय समर कबीर साहब इस लंबी नजम पर किसी का ध्यान नहीं गया लेकिन आपने अपने दो शब्द कहकर मुझे…"
6 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार इस शेयर में मैंने जलाल का अर्थ तेज प्रकाश लिया है यह मैंने एक…"
6 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"आदरणीय रवि भसीन शाहिद साहब आपका बहुत-बहुत शुक्रिया दरअसल जो बातें आपने बताई हैं वह बातें समर कबीर…"
6 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल-मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'इल्मों अदब से सारे जहां…"
7 hours ago
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post आधुनिक नारी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post समय पास आ रहा है
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत उम्द: रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (चाहा था हमने जिसको हमें वो मिला नहीं)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ख्वाब के दो खत -एक नज़्म
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,अच्छी नज़्म लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service