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ज़िन्दगी के कैनवास पर...

 

 

 

ज़िन्दगी के कैनवास पर

जीवन का मनमोहक चित्र

बनाता है वो

रंग भी मुरीद हैं

उसकी इस कला के ,

रंग प्यार के

रंग अपनेपन के

रंग दोस्ती के

रंग करुणा के

और ना जाने 

कितने ही ऐसे रंग

एहसासों के ,

सारे के सारे बेसब्र 

उसकी अद्भुत कृति का

हिस्सा बनने को  

मानो कोई होड़ मची हो

पहले भरे जाने की

इन्द्रधनुष में

 

वो करता है निर्माण


नए इन्द्रधनुषों का
रंगों के नए क्रमों के साथ

पहले से भी अधिक मनोरम

पहले से भी अधिक सुरम्य

पहले से भी अधिक दिलकश

 

यूँ ही वो बिखेरा करता है

जीवन के रंग

ज़िन्दगी के कैनवास पर ....

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Comment

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Comment by sanjiv verma 'salil' on May 24, 2011 at 7:39am
मुझको यह रचना रुची. बधाई.
Comment by Veerendra Jain on May 23, 2011 at 1:03pm
Azeez saab , Arun ji ... and Sharda ji... bahut bahut shukriya...aap logon ko rachna pasand aayi..mera likhna sarthak hua..
Comment by Abhinav Arun on May 20, 2011 at 1:15pm
कविता और चित्र चयन दोनों ही बेहद अच्छे !! सार्थक और सुलझे विचारों की कविता के लिये बधाई वीरेंद्र जी !!
Comment by Azeez Belgaumi on May 20, 2011 at 12:57pm
Bahut khoob... hamare zauq ki taskeen ho gayee

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