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गीत-सखि! री! मन न धरे अब धीर -रामबली गुप्ता

सखि! री! मन न धरे अब धीर।
विरही मन ले वन-वन डोलूँ, सही न जाये पीर।
सखि! री! मन न धरे अब धीर।

ना चिट्ठी ना पाती आयो, ना कोई संदेश।
जाय बसे कौने सौतन घर, प्रियतम कौने देश।।
राह तकत बीते दिन-रैना छिन-छिन घटत शरीर।
सखि! री! मन न धरे अब धीर।

बीते कितने साल-महीने, बीत गए मधुमास।
कितने सावन-भादो बीते, पर ना छूटी आस।।
अँखियाँ पिय दर्शन की प्यासी, झर-झर बरसत नीर।
सखि! री! मन न धरे अब धीर।

सेज-सिँगार भयो सब सूना, कजरा बहि-बहि जात।
पिय बिन सूनी भई जिंदगी, गजरा काँट बुझात।।
अब तो उपवन भी ना जाऊँ, न ही नदी के तीर।
सखि! री! मन न धरे अब धीर।

देव-देवियाँ सभी मनाऊँ, शिव-शंकर गजराज।
अब तो पिय आ जायें मोरे, श्रद्धा पूरे आज।।
जियरा में जब हूक उठे सखि! छतिया देवे चीर।
सखी री! मन न धरे अब धीर।


-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by रामबली गुप्ता on September 25, 2016 at 9:01pm
सहृदय आभार भाई वासुदेव अग्रवाल जी
Comment by रामबली गुप्ता on September 25, 2016 at 9:01pm
आपके दोनों सुझावों से सहमत हूँ आद0 गोपाल नारायन जी सहृदय आभार सराहना एवं सुझावों के लिए
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on September 25, 2016 at 7:22pm
आ.रामबली जी बहुत ही मधुर विरह गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 25, 2016 at 6:57pm

वाह  वाह रामबली जी . बहुत सुन्दर पद रचना की  आपने . दो  सम्मतियाँ हैं -

 अब तो उपवन भी ना जाऊँ, न ही नदी के तीर।  ----------   अब तो उपवन भी ना जाऊँ, ना  नदिया के तीर ।

शिव-शंकर गजराज।   -------------------------शिव-शंकर गणराज।-------गणराज गणेश हुआ गजराज सिर्फ हाथी . इस सुन्दर रचना के लिए ह्रदय तल से बधाई . आ० रामबली भाई .

Comment by रामबली गुप्ता on September 24, 2016 at 3:17pm
हार्दिक आभार आद0 भाई आशीष सिंह जी
Comment by आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला' on September 24, 2016 at 10:39am

आ. श्री रामबली गुप्ता जी!!! बहूत ख़ूब!! बधाईयाँ स्वीकार करें!

Comment by रामबली गुप्ता on September 23, 2016 at 2:33pm
हृदय से आभार आद0 भाई सुरेश कुमार जी
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on September 23, 2016 at 1:23pm
बहुत खूब! बहुत सुन्दर! आदरणीय रामबली गुप्ता जी।दिल की गहराईयों से बधाई प्रेषित है । सादर ।
Comment by रामबली गुप्ता on September 23, 2016 at 10:39am
हार्दिक आभार भाई श्याम नारायण जी
Comment by Shyam Narain Verma on September 23, 2016 at 10:34am
"क्या बात है ..... बहुत खूब ... बधाई आप को "

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