For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल(काफियों की...)

2122 2122 2122 2
काफियों का बढ़ गया बाजार देखा है
इश्क को होते हुए लाचार देखा है।1

डूबती कश्ती नहीं मँझधार है तो क्या?
हर बखत सहमी नजर में प्यार देखा है।2

लड़ रहा कोई धनुर्धर रोशनी खातिर
व्यूह का निर्माण तो बेकार देखा है।3

सच पराजित हो रहा हर मोड़ पर दिखता
झूठ की गर्दन सजाया हार देखा है।4

माँगते दाता यहाँ पर भीख में हक भी
रहजनों को तो बने सरकार देखा है।5

दे सकेंगे क्या फ़रिश्ते देश को कुछ भी
लूट का हर शख्स है फनकार, देखा है।6

छँट रहा लगता अँधेरा मंद सब तारे
रोशनी का बस जरा आसार देखा है।7
मौलिक व अप्रकाशित @मनन

Views: 620

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on December 25, 2016 at 7:39pm
आदरणीय गोपाल नारायण जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपका;परिमार्जन कर पेश किया है।
Comment by Manan Kumar singh on December 25, 2016 at 7:08pm
आदरणीय देखता हूँ,सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2016 at 6:30pm

आ० मनन जी , आपने बह्र का खुलासा नहीं किया इसलिए इसके प्रवाह की परख नहीं हो सकी . सापके मतले के उला और सानी में मुझे रब्त की कमी दिखती है . सादर .

Comment by Manan Kumar singh on December 24, 2016 at 9:04am
चौहान जी
Comment by Manan Kumar singh on December 24, 2016 at 9:03am
जरूर आदरणीय मिथिलेश जी।
Comment by Manan Kumar singh on December 24, 2016 at 9:03am
आभार चौहान नई।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 24, 2016 at 1:35am

कृपया ग़ज़ल की बह्र / वज्न लिख दीजिये आदरणीय 

Comment by narendrasinh chauhan on December 23, 2016 at 5:46pm

लाजवाब रचना

Comment by Manan Kumar singh on December 23, 2016 at 7:44am
बहुत बहुत आभार
Comment by आशीष यादव on December 23, 2016 at 1:41am
Behatarin ghazal. Shandar prastuti. Aisa hi ho gya h jmana.
Sundar rachna pr badhai.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service