For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ओबीओ की सातवीं सालगिरह का तोहफ़ा

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
(एक शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ नज़र अंदाज़ कर दें)


जो कहूँ जो लिखूँ ओबीओ के लिये
यूँ समर्पित रहूँ ओबीओ के लिये

माँगता हूँ यही आजकल मैं दुआ
जब तलक भी जियूँ ओबीओ के लिये

वक़्त इसके लिये कुछ निकालो ज़रा
ये गुज़ारिश करूँ ओबीओ के लिये

दूसरा काम कोई नहीं है मुझे
जब रुकूँ ,जब चलूँ ओबीओ के लिये

आप आऐं हमारे परिवार में
जो मिले ये कहूँ ओबीओ के लिये

अब ग़ज़ल या कथा ही नहीं दोस्तो
छन्द भी मैं लिखूँ ओबीओ के लिये

ज़िक्र इसका रहे हर ज़बाँ पर "समर"
काम ऐसे करूँ ओबीओ के लिये

समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1685

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on April 5, 2017 at 5:51pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया । आपने सही कहा,ओबीओ ज़िंदाबाद ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 5, 2017 at 5:25pm
आदरणीय समर साहब सादर नमन..बेहतरीन ग़ज़ल हुई..
Comment by Ravi Shukla on April 5, 2017 at 3:12pm

वाह वाह आदरणीय समर साहब क्‍या कहने एक बार फिर कमाल कर दिया ( पहले भी ओ बी ओ केा आधार बना कर एक गजल कही थी आपने जिसका पहला हर्फ ओ बी ओ से शुरू होता था ) आपने बहुत ही अच्‍छे भावों के साथ आपने ओ बी ओ के प्रति अपने समपर्ण को व्‍यक्त किया है दिली दाद ओ तहसीन कुबूल करें । ओ बी ओ जिंदाबाद

Comment by नाथ सोनांचली on April 4, 2017 at 4:35am
आद0 समर कबीर साहब सादर अभिवादन, वाकई में ओ बी ओ जैसा अनूठा मंच मिलना मुश्किल हैं, आपने बहुत उम्दा तरीके से आपने जज़्बात ओ बी ओ के लिए कहें, आपको हम सबकी अनन्त शुभकामनायें और बधाइयाँ
Comment by नाथ सोनांचली on April 4, 2017 at 4:35am
आद0 समर कबीर साहब सादर अभिवादन, वाकई में ओ बी ओ जैसा अनूठा मंच मिलना मुश्किल हैं, आपने बहुत उम्दा तरीके से आपने जज़्बात ओ बी ओ के लिए कहें, आपको हम सबकी अनन्त शुभकामनायें और बधाइयाँ
Comment by Samar kabeer on April 3, 2017 at 2:23pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,

'है बुरी या भली ओबीओ के लिये
वक़्फ़ है ज़िन्दगी ओबीओ के लिये'

सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 3, 2017 at 7:31am
है बहुत लाज़मी ओ बी ओ के लिए।--आपकी रहबरी ओ बी ओ के लिए।------मुहतरम जनाब समर साहिब आदाब, ओ बी ओ की मुहब्बत में डूबी खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ----
Comment by Samar kabeer on April 2, 2017 at 11:43pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ,ओबीओ ज़िंदाबाद ।
Comment by Samar kabeer on April 2, 2017 at 11:41pm
जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,

मैं अकेला नहीं मंच पर देखिये
और भी हैं यहाँ ओबीओ के लिये

सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया,दुआ कीजिये इसी तरह ओबीओ की सेवा करता रहूँ,ओबीओ ज़िंदाबाद ।
Comment by Samar kabeer on April 2, 2017 at 11:35pm
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका शुक्रगुज़ार हूँ,ओबीओ ज़िंदाबाद ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
15 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Tuesday
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service