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नेम प्लेट ...

कुछ देर बाद
मिल जाऊंगा मैं
मिट्टी में
पर
देखो
हटाई जा रही है
निर्जीव काल बेल के साथ
लटकी
मेरी ज़िंदा
मगर
उखड़े उखड़े अक्षरों की
एक अजीब सी
चुप्पी साधे
पुरानी सी 
नेम प्लेट

मुझसे पहले 

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1151

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:38pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहिब , आदाब। ... सृजन के भावों को अपने मधुर शब्दों से शोभित करने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:38pm

आदरणीय हरी प्रकाश दूबे जी सृजन के भावों को अपनी स्नेहिल प्रशंसा से शोभित करने का हार्दिक आभार। आपके द्वारा इंगित टंकण त्रुटि की ओर ध्यान आकर्षित करने का हार्दिक आभार। मैं अभी इस एडिट कर दुबारा पोस्ट करता हूँ। ये सब गूगल जी का कारनामा है। 

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:37pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है। 

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:37pm

आदरणीय लक्षमण धामी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 17, 2017 at 4:08pm

बहुत खूब ! .. भाव के क्षणिक आवेग को आपने खूबसूरती से शब्दबद्ध किया है. हार्दिक बधाइयाँ आदरणीय सुशील सरनाजी. 

एक बात : 

चुप्पी साधे / पुरानी से / नेम प्लेट .. यहाँ वाक्य गठन के अनुसार ’पुरानी से’ न हो कर ’पुरानी-सी’ होना चाहिए था.

लेकिन, नेम-प्लेट की संज्ञा को स्त्रीलिंग के तौर पर व्यवहृत करते हैं क्या ? 

सादर

Comment by Samar kabeer on July 17, 2017 at 11:45am
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, सच्चाई से क़रीब इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 5:55pm
मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब,सुन्दर भाव को समेटे अच्छी कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 4:38pm

पुरानी से की जगह सर पुरानी सी होना चाहिये , बाकी इस बहुत ही सुन्दर रचना के लिए आपको साधुवाद आदरणीय  Sushil Sarna सर !सादर 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 3:42pm

वाह बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है आदरणीय सुशिल सरना जी | हार्दिक बधाई |

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 16, 2017 at 2:10pm
बहुत खूब.......

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