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है शिकायत दिल को ऐसा क्यूँ नहीं.....{.ग़ज़ल } संतोष

 अरकान : फ़ाइलातून   फ़ाइलातून  फ़ाइलुन  

है शिकायत दिल को ऐसा क्यूँ नहीं
जब तू मेरा है तो लगता क्यूँ नहीं

जब नज़र से मिल नहीं पाती नज़र
ख़्वाब से बाहर निकलता क्यूँ नहीं

लग रही है क्यूँ थमी दुनिया मुझे
तू भी मौसम सा बदलता क्यूँ नहीं

है ज़बाँ चुप और धड़कन तेज़ है
तू इशारों को समझता क्यूँ नहीं

जिस्म ठण्डा पड़ गया'संतोष' का
आग अपनी उसको देता क्यूँ नहीं

#संतोष खिरवड़कर
{ मौलिक एवं अप्रकाशित }

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Comment by santosh khirwadkar on September 10, 2017 at 10:48pm
नमस्कार/सलाम ,
तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय सलीम साहब !
Comment by SALIM RAZA REWA on September 10, 2017 at 10:35pm
भाई संतोष जी ग़ज़ल के लिए बधाई,
Comment by santosh khirwadkar on September 10, 2017 at 10:35pm
शुक्रिया आदरणीय महेंद्र जी ..
Comment by Mahendra Kumar on September 10, 2017 at 8:06pm

अच्छी ग़ज़ल है आ. संतोष जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by santosh khirwadkar on September 9, 2017 at 2:00pm
धन्यवाद आदरणीय रोहित जी ..आभार!!
Comment by santosh khirwadkar on September 9, 2017 at 1:59pm
शुक्रिया आदरणीय बृजेश जी ...आभार!
Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on September 9, 2017 at 1:46pm

खूबसूरत ग़ज़ल संतोष जी.....  हार्दिक बधाई स्वीकारें  mlahars

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 9, 2017 at 11:17am
वाह वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई..बहुतखूब
Comment by santosh khirwadkar on September 8, 2017 at 10:17pm
शुक्रिया ,आदरणीय आशुतोष जी ...आप की ये दाद इस मंच से सम्माननीय श्री समर साहब को समर्पित!!!!
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 8, 2017 at 9:16pm
आदरनीय संतोष जी अच्छी ग़ज़ल हुयी है हार्दिक बधाई स्वीकार करें

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