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नारी न अबला, आज सबला, हौसले की खान
हर गम सहे वो, बिन कहे वो, बिखेरे मुस्कान
ममतामयी वो, गुण क़ई जो, ईश का वरदान
सम्मान घर की, शक्ति नर की, देव गाते गान

शिशु साथ पाले, घर सँभाले, और बाहर नाम
उल्टी पवन हो, थल गगन हो, करे ना आराम
कंधा मिलाकर, पग बढ़ाकर, ख़डी है हर धाम
पीछे नहीं अब, वो करे सब, हर तरह के काम

घर से निकलती, साथ चलती, हर कदम अब नार
अपनी लगन से, नित सृजन से, रचे नव संसार
छोटा बड़ा हो, दुख खड़ा हो, वो न माने हार
देवी स्वरूपा, स्नेह रूपा, शक्ति का अवतार

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 21, 2017 at 1:47pm
आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, रचना पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया के लिए हृदय तल से आभार
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 21, 2017 at 12:54pm
वाह वाह खूब..नारी महिमा का बखान करते हुए सुन्दर रचना...
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 20, 2017 at 4:47pm
आद0 तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन, रचना के भावों को आत्मसात कर बेह्तरीन प्रतिक्रिया से अवगत कराने और बधाई के लिए हृदय तल से आभार।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 20, 2017 at 4:42pm
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, मेरी रचना पर आपका आशीष मिला, रचनाकर्म सार्थक हुआ। आपके उत्साहवर्धन से और बेहतर लिखने की प्रेरणा मिलती है, बहुत बहुत आभार आपका।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 19, 2017 at 8:53pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,महिलाओं का दर्द बयान करते सुन्दर कामरूप छन्द हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by Samar kabeer on November 19, 2017 at 5:23pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,महिला सशक्तिकरण पर बहुत उम्दा कामरूप छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 18, 2017 at 11:48am
आद0 सलीम साहब सादर अभिवादन, रचना पर आपकी उपस्थिति और मुबारकबाद का बहुत बहुत आभार
Comment by SALIM RAZA REWA on November 18, 2017 at 10:10am

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई ,, कहीं कहीं गेयता भंग हो रही है देखिएगा 

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