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कविता--उम्मीद की कुनकुनी धूप

लो फिर आ गई !
नए साल के स्वागत में
उम्मीद की कुनकुनी धूप
भरोसे की मुँडेर पर
आशा-आकांक्षा की परियाँ भी
धीरे-धीरे उतरेंगी धैर्य के आँगन में
नई सोच का बाज़ीगर
सजाएगा नये-नये सपनें
जमा है जो तुम्हारे पास
अडिग विश्वास की पूँजी
अब उसे खर्च करना होगा
नये साल में मितव्ययिता के साथ
नया साल आहिस्ता-आहिस्ता
आज़माएगा तुम्हें
सावधान !! डरना नहीं
धारण कर लो अपना
फौलादी इरादों वाला कवच
जो तुमने गढ़ा है श्रम से ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment

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Comment by Mohammed Arif on December 8, 2017 at 8:31pm

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय सलीम रज़ा साहब ।

Comment by SALIM RAZA REWA on December 8, 2017 at 7:57am
जनाब आरिफ साहब, नए साल की कविता और अडवांस में नए साल की मुबारक़बाद,
Comment by Mohammed Arif on December 7, 2017 at 7:36am

बहुत-बहुत आभार आदरणीय कालीपद प्रसाद जी । लेखन सार्थक हुआ ।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 6, 2017 at 8:17pm

आ मोहम्मद आरिफ साहिब , इस बहुत सुन्दर अतुकांत कविता के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by Mohammed Arif on December 6, 2017 at 2:23pm

आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब , आदरणीय अजय तिवारी जी , आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहब , आदरणीय अमोद श्रीवास्तव जी , आदरणी अफरोज़ सहर जी आप सभी हार्दिक  आभार । आपकी प्रतिक्रिया से लेखन सार्थक हो गया ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 5, 2017 at 7:55pm

जनाब आरिफ साहिब आदाब ,सुन्दर और सशक्त कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें।

Comment by Ajay Tiwari on December 5, 2017 at 3:26pm

आदरणीय आरिफ साहब,

इस खूबसूरत काव्य-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाईयाँ.

सादर 

Comment by Samar kabeer on December 5, 2017 at 3:19pm

जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,बहुत सुंदर और सशक्त प्रस्तुति,बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on December 5, 2017 at 10:06am

 बेहद कसी हुई प्रस्तुति। ढेरों बधाई आदरणीय

Comment by Afroz 'sahr' on December 5, 2017 at 8:36am
वाह वाह बहुत ख़ूब जनाब मो.आरिफ़ साहिब इस सुंदर कविता के लिए आपको ढेरों बधाई,,,,

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