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तुम्हारा मुस्कुराना और भी बीमार कर देगा

अरकान :1222  1222  1222  1222

अजब सी कश्मकश से यकबयक दो चार कर देगा

तुम्हे पहचानने से वो अगर इनकार कर देगा

ज़माने में जियो खुल के जवानी साथ है जब तक

करोगे क्या बुढ़ापा जब तुम्हे लाचार कर देगा

हक़ीक़त सामने है आज यह जो,  देख लेना कल

सही को भी ग़लत ये सुब्ह का अखबार कर देगा

रखें कुछ भी नहीं दिल में छुपा के आप भी मुझसे

नहीं तो शक खड़ी इक बीच में दीवार कर देगा

समझना मत कभी कमज़ोर, दुश्मन को ज़माने में

अगर मौका मिला उसको पलटके वार कर देगा

हमे अब दे रहा चेतावनी ये धुन्ध का आलम

अगर अब भी न जागे ज़ीस्त ये दुश्वार कर देगा

तबीअत इश्क़ में पहले से ही नाशाद है उसकी

तुम्हारा मुस्कुराना और भी बीमार कर देगा

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 21, 2017 at 2:07pm

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर सुखनवाजी का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 21, 2017 at 2:06pm

आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पसन्द आयी। कहना सार्थक हुआ। आभार आपका।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 21, 2017 at 2:04pm

आद0 कल्पना भट्ट जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी सुखनवाजी का बहुत बहुत शुक्रिया।सादर

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 21, 2017 at 1:57pm

आद0 नवीन जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पसन्द आयी। लिखना सार्थक हुआ। आपका आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 21, 2017 at 6:23am

आ. भाई सुरेंद्र जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 20, 2017 at 8:14pm

हमे अब दे रहा चेतावनी ये धुन्ध का आलम
अगर अब भी न जागे ज़ीस्त ये दुश्वार कर देगा...वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी क्या खूब कहा है..बेहतरीन ग़ज़ल

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on December 20, 2017 at 6:54pm

अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय | हार्दिक बधाई |\

Comment by Naveen Mani Tripathi on December 20, 2017 at 2:00pm

वाह बहुत खूब भाई । सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 20, 2017 at 1:29pm

आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई का हृदय तल से आभार। 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on December 20, 2017 at 1:28pm

आद0 सलीम रज़ा साहब सादर अभिवादन। शैर आप तक पहुँचे, लिखना सार्थक हुआ। बहुत बहुत आभार आपका।

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