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ख़ुद से ये शर्मशार सा क्यों है (ग़ज़ल)

अरकान-: 2122  1212  22

ख़ुद से ये शर्मसार सा क्यों है

आदमी बेक़रार सा क्यों है 

मेरे दिल ने सवाल ये पूछा,

नेता हर इक गंवार सा क्यों है

आने वाले नहीं हैं अच्छे दिन,

फिर हमें इन्तिज़ार सा क्यों है

मैंने कुछ भी नहीं छुपाया फिर

तुझमें ये इंतिशार सा क्यों है 

मैंने जब माँग ली मुआफ़ी,फिर

उनके दिल में ग़ुबार सा क्यों है 

उसकी फ़ितरत से ख़ूब वाक़िफ़ हैं,

'फिर हमें एतिबार सा क्यों है'

उम्र भर मौज की बहुत हमने,

पर बुढ़ापा ये भार सा क्यों है

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on December 29, 2017 at 5:14am

आद0 लक्ष्मण जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार ग़ज़ल की सराहना के लिए

Comment by नाथ सोनांचली on December 29, 2017 at 5:12am

आद0 तस्दीक अहमद खानजी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पसन्द आयी। लिखना सार्थक हुआ। बहुत बहुत आभार आपका।

Comment by नाथ सोनांचली on December 29, 2017 at 5:11am

आद0 महेंद्र कुमार जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हृदय तल से आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 28, 2017 at 10:11pm

सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 28, 2017 at 6:21pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।

Comment by Mahendra Kumar on December 28, 2017 at 3:14pm

उम्र भर मौज की बहुत हमने,

पर बुढ़ापा ये भार सा क्यों है ...बहुत ख़ूब!

उम्दा ग़ज़ल है आ. सुरेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2017 at 2:28pm

आद0 अजय तिवारी जी सादर प्रणाम। आपकी प्रतिक्रिया से हम बात समझ रहे थे। कोई और बूढ़ा न् समझ बैठे, इसलिये लिखना भी पड़ गया। हाहाहाहा हाहा ..... आपकी दुवाओ के लिए शुक्रिया।सादर

Comment by Ajay Tiwari on December 28, 2017 at 2:22pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी,

 \\मैं तो अभी जवान हूँ या अपने को जवान समझता हूँ\\ 

आप माशाअल्लाह! अभी तो गबरू जवान है. वो बात सिर्फ एक मजाक थी.

सादर 

Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2017 at 2:02pm

आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पसन्द आयी,कहना सार्थक हुआ।हृदय तल से आभार आपका

Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2017 at 2:02pm
आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पसन्द आयी,कहना सार्थक हुआ।हृदय तल से आभार आपका

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