For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गरम कड़ाही में वे नाच रहे थे। नहीं, उन्हें नचाया जा रहा था।‌ उबलते तेल में एक झारे से उन्हें पलटा जा रहा था। रंग बदलते ही उन्हें कड़ाही से बाहर कर थाली में और फिर दीवाने ग्राहकों को दोनों में चटनी के साथ पेश किया जा रहा था। उनमें से एक युवक की निगाहें कभी कड़ाही में, कभी हाथों में थामे गये 'दोनों' पर, तो कभी ग्राहकों के चलते जबड़ों पर जा रहीं थीं, तो कभी झारा चलाते युवा पकोड़ेवाले पर।

"यूं क्या देख रहे हो? क्या सोच रहे हो भाई? आपको कितने के चाहिए?" कुछ पकोड़े थाली में उड़ेलते हुए  उस पकोड़वाले ने मुस्करा कर कहा।

"बेटा, न तो पकोड़े बनाने और बेचने में शरम की बात है और न ही पकोड़े खाने में! लो और खाओ तुम भी!" पास खड़े एक बुज़ुर्ग ने मिर्ची वाला पकोड़ा खाते हुए कहा।

"सब तो खा रहे हैं हमें तल-तल के!" उबलते विचारों से गरम होते हुए उस युवक ने कहा।

"क्या मतलब?" उसके एक साथी ने पूछा।

"मतलब यह कि मैं... मैं  'पकोड़ा' हूं और तू भी और हम जैसे ये सभी बेरोज़गार भी पकोड़े ही हैं!" उसने साथी के हाथ के दोने को दूर फेंकते हुए कहा- "झारे उनके हाथों में है!"

"किन के हाथों में?"

" नेताओं, सरकारों, रईसों और कारपोरेट घरानों के हाथों में!" उसने लगभग चीखते हुए कहा।

"लेकिन वे सब भी पकोड़े ही तो हैं अपने मुल्क में बेटा!" तसल्ली देने की कोशिश में उस बुज़ुर्ग ने उस परेशान युवक की ओर देख कर मुस्कराते हुए कहा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 646

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 10, 2018 at 10:41pm

रचना पटल पर उपस्थित होकर अपनी राय से अवगत कराने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब वीरेंद्र वीर मेहता जी।

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on February 10, 2018 at 11:39am

भाई शेख शहज़ाद उस्मानी जी, सुन्दर रचना बनी है सामयिक विषय के अनुरूप.... हालांकि ऐसी रचनाओं की काल अवधि बहुत अल्प होती है लेकिन फिर भी पकोड़ा बयानबाज़ी को आपने प्रयोग करके अच्छा कथानक बना दिया। बधाई स्वीकार करें भाई जी.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 9, 2018 at 10:50pm

अपने विचारों और प्रतिक्रिया से अवगत कराने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता कसार जी,  आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब, आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहिब और आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब।

Comment by Nita Kasar on February 8, 2018 at 2:51pm

पकौड़ा राजनीति पर आधारित कटु व्यंग्य किया है आपने बधाई कथा के लिये आद० शहज़ाद भाई ।

Comment by नाथ सोनांचली on February 7, 2018 at 8:01pm

आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढिया लघुकथा। अच्छे दिनों की सौगात पकौड़े के साथ..... इस प्रस्तुति पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by SALIM RAZA REWA on February 7, 2018 at 5:53pm
वह वाह उस्मानी साहब क्या खूब लघुकथा हुई है,
दिल को छू गई मुबारक़बाद क़ुबूल करें.
Comment by TEJ VEER SINGH on February 7, 2018 at 10:45am

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। पकोड़ा पुराण पर बेहतरीन विश्लेषण करती उत्तम लघुकथा।

Comment by Mohammed Arif on February 6, 2018 at 1:17pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                              बहुत ही बेहतरीन , सशक्त और सामयिक लघुकथा । पकोड़ा बयानबाज़ी को आपने तत्काल अपनी लघुकथा का कथानक बना दिया । वाकई यह कमाल की बात है । जागरूक रचनाकार की यही पहचान होती है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service