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पानी-पानी ...

ख़ून
ख़ून से ही
कतराता है
मगर
पानी से मिल जाता है
इसीलिये
रिश्ता
ख़ून का
हो जाता है
पानी-पानी
ख़ून के सामने

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 747

Comment

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Comment by Sushil Sarna on April 3, 2018 at 8:27pm

आदरणीया  Neelam Upadhyaya जी सृजन अपनी वाह से प्रशंसित करने का दिल से आभार। 

Comment by Neelam Upadhyaya on April 3, 2018 at 4:28pm

आदरणीय सुशील जी,  बहुत ही प्रभावशाली रचना । प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on April 3, 2018 at 4:00pm

आदरणीय अजय \तिवारी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on April 3, 2018 at 4:00pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब .... प्रस्तुति के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 3, 2018 at 4:00pm

आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब , आदाब। ... सृजन की काव्यात्मक प्रशंसा का दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on April 3, 2018 at 3:59pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी सृजन अपनी वाह से प्रशंसित करने का दिल से आभार।

Comment by Ajay Tiwari on April 1, 2018 at 5:42pm

आदरणीय सुशील जी,  इस प्रभावशाली काव्य-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.

इसका सघन नियंत्रित शिल्प बहुत अच्छा लगा.

सादर 

Comment by Samar kabeer on March 31, 2018 at 5:57pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,कम शब्दों में बहुत उम्दा कविता,बहुत ख़ूब, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 31, 2018 at 9:01am

बहुत ही महत्वपूर्ण व सारगर्भित क्षणिका सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब सुशील सरना जी।

कुछ मेरी पंक्तियां यूं ही :

जब

ख़ून

काम आता है

अपने या

अपने जैसे ख़ून के

ख़ून

कर देता है

दुश्मनी, नाइत्तेफाकी का।

--------------------------------

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on March 30, 2018 at 6:47pm

वाह! सुंदर और सार्थक रचना हुई है आदरणीय सुशिल सरना जी | हार्दिक बधाई स्वीकारें |

कृपया ध्यान दे...

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