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निर्मोही रिश्ते ...

निर्मोही रिश्ते ...

भावों की ज़मीन को
करते हैं बंजर
बंजारे से
ये
आजकल के
निर्मोही रिश्ते

जीवन को
मृत्यु का
कफ़न पहनाते
ये
आजकल के
निर्मोही रिश्ते

अपनी ही कोख़ से
अनजान बनते
ये
आजकल के
निर्मोही रिश्ते

कितना अजीब लगता है
जब
मृत रिश्तों को
कांधा देते
ले जाते हैं
दुनियावी सड़क से
मरघट तक
ये मृत केंचुली में
स्वांग रचाते
ज़िंदा
निर्मोही रिश्ते

सच
रिश्तों के कांधों पर
रिश्तों की लाशें
ढोते हैं
ये
आजकल के
निर्मोही रिश्ते

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 514

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Comment by Sushil Sarna on March 30, 2018 at 6:42pm

आदरणीय सोमेश कुमार जी सृजन को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on March 30, 2018 at 6:42pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , ... अपने चिर परिचित अंदाज़ में सृजन के भावों को अपने आशीर्वाद से अलंकृत करने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on March 30, 2018 at 6:42pm

आदरणीय वीरेन्दर वीर मेंता जी सृजन के भावों की आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on March 30, 2018 at 6:41pm

आदरणीय तेज वीर सिंह जी सृजन आपकी मधुर सराहना का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on March 30, 2018 at 6:41pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब , आदाब ... सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by somesh kumar on March 30, 2018 at 11:03am

निर्मोही रिश्तों पर मोहक रचना |

Comment by Samar kabeer on March 29, 2018 at 2:51pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, रिश्तों के बदलते अंदाज़ को अपनी कविता में बहुत उम्दा तरीक़े से बयान किया है आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on March 29, 2018 at 2:23pm

बहुत सुन्दर. आदरणीय सुशील सरना जी, आजकल के निर्मोही रिश्तों की कितनी उम्दा व्याख्या की है आपने. सच में दिल को छूती  लाजवाब रचना। हार्दिक बधाई स्वीकार करें भाई जी  

Comment by TEJ VEER SINGH on March 29, 2018 at 11:08am

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। बेहतरीन कविता।

Comment by Mohammed Arif on March 29, 2018 at 8:08am

आधरणीय सुशील सरना जी आदाब,

                             रिश्तों को केंद्र में रखकर रची गई बहुत ही लाजवाब रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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