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नवगीत- चल दिया लेकर तगारी -बसंत

चल दिया लेकर तगारी

© बसंत कुमार शर्मा

 

सिर्फ रोटी के लिए बस,

खट रही है उम्र सारी.

सूर्य निकला भी नहीं, वह,

चल दिया लेकर तगारी.

 

ठण्ड, बारिश, धूप तीखी,

वार सारे सह रहा है.

और उसका खून ही तो,

बन पसीना बह रहा है.

 

ढक गया नीचे बदन कुछ,

देह ऊपर है उघारी.

 

हड्डियों का एक ढाँचा,

लग रहा जैसे बिजूका.

झेलता है आदमी यह,

जेठ में लू के भभूका.

 

रात दिन जोती धरा, पर

पट न पायी है उधारी.

 

चाल टेढ़ी है ग्रहों की,

भय उसे पंडित दिखाते

रोज साहूकार अपना,

रौब घर आकर जमाते.

 

जन्म से सुनता रहा है,

बँट रही इमदाद भारी.

"मौलिक एवं अप्रकाशित "

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 16, 2018 at 4:04pm

आदरणीय  Neelam Upadhyaya जी आपका तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 16, 2018 at 4:04pm

आदरणीय Ajay Kumar Sharma जी आपका तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by Neelam Upadhyaya on April 16, 2018 at 10:46am

आदरणीय अजय तिवारी जी, बहुत ही सुंदर रचना । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Ajay Kumar Sharma on April 14, 2018 at 8:55pm

बहुत सुन्दर रचना.

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 14, 2018 at 8:46pm

आदरणीय  Ajay Tiwari जी आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by Ajay Tiwari on April 14, 2018 at 5:05pm

आदरणीय बसंत जी, एक और अच्छे नवगीत के लिए हार्दिक बधाई.

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 14, 2018 at 11:58am

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी आपके अनुकरणीय सुझावों से मुग्ध हूँ, बहुत सुंदर , इसी तरह स्नेह बनाये रखें सादर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 14, 2018 at 11:20am

आ. बसंत जी,
एक के बाद एक सुंदर गीत पेश करने के लिए बधाई ..
कई पंक्तियों में ही भर्ती का है.. पहली पंक्ति में मात्र रोटी में र-र आपस में टकरा रहे हैं 

सिर्फ रोटी के लिए बस ,

खट रही है उम्र सारी.
.

और उसका खून ही तो 

बन पसीना बह रहा है.

.
भय उसे पण्डित दिखाते 
.
रौब घर आकर जमाते 
.
जन्म से सुनता रहा है ,
.
कुछ सुझाव   हैं, आग्रह नहीं है ..
सादर 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on April 14, 2018 at 10:21am

आदरणीय Samar kabeer जी आभार आपका, मैं कुछ करता हूँ 

Comment by Samar kabeer on April 14, 2018 at 10:17am

'बता पंडित डराते' 12 मात्रा

'रौब घर आकर दिखाते' 14 मात्रा,

इस हिसाब से यूँ होना चाहिये:- "ये बता पंडित डराते'"

कृपया ध्यान दे...

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