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लघुकथा-बेटी बचाओ

उस दिन जन सामान्य का उत्साह देखते ही बनता था. टीवी, रेडियो, अखबार ..सब जगह नेता जी की पहल का चर्चा था. आख़िर किसी ने तो बेटी के महत्व को समझ कर बेटी बचाओ जैसा महान नारा दिया था समाज को ...
आज जब दो बेटियों के बलात्कार की और एक आठ साल की बेटी की नृशंस हत्या की ख़बर पढ़ी तो पहले पहल यह रोज़मर्रा की ख़बर ही लगी ... फिर ख़बर की डिटेल्स में पढने को मिला कि नेताजी के दल के लोग बलात्कारियों के समर्थन में सड़क पर तिरंगा लेकर वन्दे मातरम का घोष कर रहे हैं तो अचानक मन में यह सवाल उठ खड़ा  हुआ कि बेटी बचाओ एक नारा था या एक खुली चेतावनी...कि ..............अब हम आ गए हैं, अपनी बेटी बचाओ. 
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निलेश "नूर"
मौलिक व अप्रकाशित  

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 18, 2018 at 8:11pm

धन्यवाद आ डॉ आशुतोष जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 18, 2018 at 8:11pm

धन्यवाद आ नीलम जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 18, 2018 at 3:21pm

आदरणीय भाई निलेश जी एक रचना में सन्देश प्रेषित करने का जो माद्दा होना चाहिए इस रचना में है ..कम शब्दों में जबरदस्त झटका देते इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Neelam Upadhyaya on April 16, 2018 at 4:19pm

आदरणीय नीलेश जी, बहुत ही रचना । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 16, 2018 at 9:06am

धन्यवाद आ, मोहम्मद आरिफ़ साहब,

मुझे नाहीं पता कि यह लघुकथा है या नहीं लेकिन मुझे यकीन है कि यह अपनी बात बुलंद आवाज़ में कह रही है और वही इसके होने का उद्देश्य भी है।

सादर

Comment by Mohammed Arif on April 15, 2018 at 7:45am

आदरणीय नीलेश जी आदाब,

                            प्रयास अच्छा है लेकिन यह लघुकथा के विधानों पर कतई खरी नहीं उतरती है । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 15, 2018 at 5:46am

धन्यवाद आ शेख शहज़ाद उस्मानी साहब

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 15, 2018 at 5:45am

धन्यवाद आ अजय जी,

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 15, 2018 at 1:41am

अन्य रचनाकारों की तरह रेप पीड़िता के नाम का प्रचार-प्रसार किये बिना विश्व स्तर पर सार्थक   चिंतनन मनन को  प्रेरित करती बेहतरीन रचना।‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌

अंतिम भाग के लिए हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय नीलेश शेव्गांवकर साहिब।

Comment by Ajay Tiwari on April 14, 2018 at 5:55pm

आदरणीय निलेश जी,

इस विधा में मेरी बहुत दखल नहीं है इस लिए मैं विधागत बारीकियों में जाऊंगा भी नहीं. लेकिन बात को साहसपूर्ण और प्रभावी ढंग से कहने के लिए हार्दिक बधाई. 

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