For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )

शहीदों को ख़िराजे अक़ीदत 
------------------------------
वो  तिरंगे में लिपट गांव जब आया होगा |
तो हर इक शख़्स ने चुल्हा न जलाया होगा |
******
क्या न गुज़रेगी किसी दिल पे बयाँ हो कैसे 
आख़री फूल तिरे सर पे चढ़ाया होगा |
******
जब गए दोस्त उसे आज सलामी देने 
याद गुज़रा उसे  बचपन भी फिर  आया होगा |
******
अश्क करते है बयाँ ज़ीस्त जो बाक़ी मेरी 
आज के बाद न महबूब का साया होगा |
******
'तेरी ख़ुशबू से जवाँ रात है मेरी अब तक '
आख़री ख़त में ये पैग़ाम भी आया होगा | 
*******
फ़ख़्र से सर भी उठा और नमी आँखों में 
तेरा ताबूत पिता ने जो उठाया होगा |
******
लाडली जो थी तेरी नूर जिसे कहता था
दीप उसने अभी ख़ामोश जलाया होगा |
******
जो हँसाता रहा जीवन में सभी लोगों को 
आज की रात हजारों को रुलाया होगा |
******
अलविदा ! देश तुम्हे याद रखेगा बरसों 
फ़र्ज़ ऐसा भी किसी ने न निभाया होगा |
******
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' बीकानेरी

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 526

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on February 19, 2019 at 6:45pm

आद0   गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत जी सादर अभिवादन।आपने बेहतरीन ग़ज़ल से भारत माँ के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी है, मेरे भी भाव इस रचना में समाहित हैं। बधाई स्वीकार कीजिये। 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 16, 2019 at 4:42pm

आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आदाब और रचना की सराहना के लिए सादर आभार | 

Comment by Samar kabeer on February 16, 2019 at 2:53pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अमर शहीदों को अपनी रचना से अच्छा ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया आपने,बधाई स्वीकार करें ।

'जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा'

इस मिसरे में तनाफ़ुर देखें,मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'वो तिरंगे में लिपट गाँव जब आया होगा'

'जब गए दोस्त उसे आज सलामी देने 
आज फिर याद भी बचपन उसे आया होगा'

इस शैर में शुतरगुरबा दोष है,देखियेगा ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 16, 2019 at 12:46pm

जयहिंद 

Comment by narendrasinh chauhan on February 16, 2019 at 11:49am

जय हिन्द 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
22 minutes ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
1 hour ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
9 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday
Admin posted discussions
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service