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ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)

बैंक ने रेहन रखी संपत्तियों की नीलामी की सूचना छपवाई।साथ में फोन पर बात करती किसी लड़की की भी फोटो छप गई। बैंक वाले खुश थे कि इससे नीलामी प्रक्रिया का प्रचार प्रसार होगा,मुफ्त में ।उधर फोटो वाली लड़की आग - बबूला हो रही थी  --
' भला ऐसा कैसे कर सकते हैं ये बैंक वाले?'
' कर चुके,' दूसरे ग्राहक ने आं खें मटकाई।
' अरे मैं तो इस ऑफिस में कल पैसे जमा कराने आई थी,जब ये बैंक वाले अपने नोटिस बोर्ड की फोटो ले रहे थे...करम..ज ...ले सब।'
' और संपत्ति विवरण में आपकी भी फोटो आ गई?'
' और क्या?..…. ये सब नासपीटे ऐसे ही हैं।मैंने सोचा किसी भले काम के प्रचार की खातिर इसकी फोटो अख़बार में लगी है।' काकी गुर्राई।
' और मैं तो दंग रह गई, कि मुझसे बिना पूछे मेरी फोटो छपी कैसे,' लड़की उखड़ गई।
' नोटिस बोर्ड की फोटू के साथ तुम्हारी भी आ गई होगी,गलती से,' किसी तीसरे ग्राहक ने ज्ञान बघाड़ा।
' ऐसी गलती हो ही क्यूं?' लड़की चिग्घाड़ी।
' ग्राहक - फ्रेंडली कार्य है',दूसरे ग्राहकों ने चुटकी ली।
लड़की आंखें तरेड़ती रह गई।
उधर बैंक मैनेजर सबकी नजर बचाकर निकल गया।
 'मौलिक व अप्रकाशित '

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Comment by Manan Kumar singh on February 27, 2020 at 2:08pm

आपका आभार आदरणीय समर जी। 

Comment by Samar kabeer on January 28, 2020 at 2:37pm

जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Manan Kumar singh on January 21, 2020 at 2:53pm

शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण जी।

Comment by Manan Kumar singh on January 21, 2020 at 2:52pm

आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 21, 2020 at 6:51am

आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by नाथ सोनांचली on January 20, 2020 at 4:23pm

आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। बढ़िया व्यंग्यात्मक लघुकथा पर आपको बधाई निवेदित करता हूँ

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