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गज़ल -9 (मां जिधर भी नज़र उठाती है, वो ज़मीं हँसती मुस्कुराती है)

2122 1212 22/112

माँ
***
माँ जिधर भी नज़र उठाती है
वो ज़मीं हँसती मुस्कुराती है//१

हर बला दूर ही ठहर जाए
माँ उसे डांट जब लगाती है //२

माँ के कदमों से दूर जाए जो
ज़िन्दगी फिर उसे रुलाती है //३

पास जब मौत आए बच्चों के
तब तो माँ जां पे खेल जाती है //४

जब कभी भूल हमसे हो जाए
माँ ही दामन में तब छुपाती है //५

भूख के साये में न हों बच्चे
खुद को माँ धूप में सुखाती है //६

मुस्कुराहट बनी रहे घर में
घर के सब बोझ माँ उठाती है //९

चैन की नींद वो ही सो पाए
माँ जिसे लोरियाँ सुनाती है //८

मां के दामन में सिर्फ प्यार भरा
प्यार ही प्यार वो लुटाती है //९

चोट खाता क़मर कहीं भी जब
लब पे तब सिर्फ़ माँ ही आती है//१०

-- क़मर जौनपुरी

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by सूबे सिंह सुजान on November 27, 2018 at 5:59am

बहुत अच्छे भाव व्यक्त हुए 

Comment by TEJ VEER SINGH on November 26, 2018 at 8:41pm

हार्दिक बधाई आदरणीय  क़मर जौनपुरी जी।बेहतरीन गज़ल।

मुस्कुराहट बनी रहे घर में
घर के सब बोझ माँ उठाती है //९

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 26, 2018 at 7:23pm

आ. भाई कमर जी, माँ को समर्पित सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by क़मर जौनपुरी on November 25, 2018 at 10:56pm

बहुत बहुत शुक्रिया जनाब राज़ साहब हौसला आफ़ज़ाई के लिए

Comment by राज़ नवादवी on November 25, 2018 at 8:50pm

जनाब क़मर जौनपुरी साहब आदाब, इस ख़ूबसूरत पेशकश पे दिल से मुबारकबाद. सादर 

Comment by क़मर जौनपुरी on November 25, 2018 at 5:34pm

बहुत बहुत आदाब व शुक्रिया मोहतरम समर कबीर साहब। आपकी मुहर लग गई, ग़ज़ल मुकम्मल हो गई।

Comment by Samar kabeer on November 25, 2018 at 5:32pm

जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब, माँ को समर्पित अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

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