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ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा

ग़ज़ल 

.

क्यूँ  कहते हो कोई कमतर होता है !
दुनिया  में  इन्सान बराबर होता है !
 
पाकीज़ा  जज़्बात  है  जिसके सीने में !
उसका  दिल  भरपूर मुनौअर होता है !
 
ज़ाहिद का क्या काम भला मैख़ाने  में !
मैख़ाना तो  रिंदों  का घर  होता है !
 
जो  तारीकी  में  भी  रस्ता दिखलाए !
वो  ही हमदम  वो ही रहबर  होता है! 
 
टूटा -फूटा  गिरा-पड़ा कुछ  तंग सही !
अपना घर  तो अपना ही घर होता है! 
 
ताल  में  पंछी पनघट गागर चौपालें !
कितना सुन्दर गाँव का मंज़र होता है! 
 
कैद  करो  न  इनको पिंजरों में कोई !
अम्न  का पंछी "रज़ा''  कबूतर होता है! 

 

SALIM RAZA REWA

 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Neeraj Nishchal on August 11, 2013 at 11:02am
कोई जवाब नही सलीम साहब आपकी इस ग़ज़ल
का बहुत ही खूब सूरत है .....
एक एक शेर एक एक शेर से बढ़कर है ।
Comment by SALIM RAZA REWA on August 10, 2013 at 8:37pm

giriraj ji,,vijay mishraji,,aakash verma ji,,sandeep ji,,keval prasad ji ,,basant nema ji,, aur shyam narayan verma ji ,,-aap tamam logo ki ruhani duaae mili khushi hui--gazal pasand aai SHUKRIYA


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Comment by गिरिराज भंडारी on August 10, 2013 at 7:59pm

टूटा -फूटा  गिरा-पड़ा कुछ  तंग सही !

अपना घर  तो अपना ही घर होता है!

वाह सलीम भाई वाह !! लाख लुभाये महल पराये , अपना घर फिर अपना घर है ( मुकेश जी का एक गाना है )

Comment by विजय मिश्र on August 10, 2013 at 5:12pm
"जो तारीकी में भी रस्ता दिखलाए !
वो ही हमदम वो ही रहबर होता है! " - बेहद खूबसूरत और करीने से रखी गयी गजल . रज़ा भाई ! मुबारकवाद कुबूल फरमाएँ .
Comment by Akash Verma on August 10, 2013 at 4:00pm

Bahut Badiya Saleem ji...
apse dubara mulakat hi nai hui apse....

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on August 10, 2013 at 3:48pm

बहुत सुन्दर आदरणीय राजा जी 

बहुत बहुत दाद क़ुबूल कीजिये 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 10, 2013 at 3:09pm

आ0 रजा भाई जी, बेहतरीन गजल। //टूटा -फूटा गिरा-पड़ा कुछ तंग सही !
अपना घर तो अपना ही घर होता है!
// वाह! क्या बात है। तहेदिल से बधाई स्वीकारें। सादर,

Comment by बसंत नेमा on August 10, 2013 at 1:37pm

बहुत सुन्दर ..बधाई सलीम भाई जी 

Comment by Shyam Narain Verma on August 10, 2013 at 1:05pm
बहुत ही सुन्दर! हार्दिक बधाई आपको!

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