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अच्छे दिन व्यापार हुआ करते हैं-- डॉ o विजय शंकर

दुआओं में याद कीजियेगा ,
जब याद कीजियेगा ,
दुआ कीजियेगा।
मिलते हैं तो कहते हैं ,
आपकी सुबह अच्छी हो ,
शाम अच्छी हो ,
रात अच्छी हो,
जितनी बार मिलते हैं , हर बार कहते हैं ।
दिन रहते , विदा होते हैं , तो
आपका दिन अच्छा हो , कहते हैं ।
दुआओं में असर होता है ,
लोग यूँ भी दुआ करते हैं ,
हाथ मिला कर कहते हैं,
सिर को थोड़ा झुका कर कहते हैं ,
मुस्कुरा कर कहते हैं ,
जिसे जानते हैं , उस से कहते हैं ,
नहीं जानते , उस से भी कहते हैं ,
हर किसी से , अजनबी से भी यही कहते हैं ।
आपका दिन अच्छा हो , कहते हैं ,
आपका हर वक्त अच्छा हो , कामना करते हैं.
बस एक शिष्टाचार है, अभिवादन में कहते हैं.
फिर भी कितनों के अच्छे दिन :
कितनों के अच्छे दिन मरीचका होते हैं,
स्वप्न हैं जो कभी पूरे नहीं होते हैं ,
उनसे कोई कहता नहीं ,
उनके लिए कोई दुआ करता भी नहीं,
वादे होते हैं, उनसे अच्छे दिन के वादे होते हैं,
अच्छे दिन के सौदे होते हैं , खूब होते हैं,
इसके बदले , उसके बदले , दो चार
अच्छे दिन मिला करते हैं ,
अच्छे दिन दुआ नहीं , व्यापार हुआ करते हैं,
अच्छे दिन के व्यापार खूब हुआ करते हैं||

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 630

Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on January 19, 2015 at 11:06pm
आपको रचना पसंद आई , बहुत अच्छा लगा।आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी , आपकी सद्भावनाओं एवं बधाई हेतु धन्यवाद, सादर।
Comment by Hari Prakash Dubey on January 19, 2015 at 7:21pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर पुनः बधाई आपको ! दो - तीन बार पढ़ लिया रचना को ! सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 19, 2015 at 7:11pm
प्रिय जितेंद्र जी , आपकी सद्भावनाओं , बधाइयों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 19, 2015 at 7:06pm
आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, उत्साह वर्धन हेतु , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 19, 2015 at 6:52pm
उत्साह वर्धन हेतु बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद आदरणीय लक्षमण धामी जी, सादर।
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 19, 2015 at 5:30pm

बहुत सुंदर बात कही है आपने. औपचारिकताओं के बाद या साथ भी, अच्छे दिन व्यापार ही हुआ करते है. बधाई लीजिये आदरणीय डा. विजय जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 19, 2015 at 3:19pm

आदारणीय विजय भाई , सुन्दर वैचारिक कविता के लिये आपको बधाइयाँ ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 19, 2015 at 12:21pm

आ० भाई ,  डॉ विजय शंकर जी , सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 18, 2015 at 11:44pm
रचना आपको सुरुचि पूर्ण एवं सही लगी , बहुत बहुत धन्यवाद , आदरणीय सोमेश कुमार जी, सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 18, 2015 at 11:41pm
रचना आपको पसंद आई , आभार एवं धन्यवाद , आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी, सादर।

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