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लोकतंत्र - डॉo विजय शंकर

( 1 )
लोकतंत्र ?
जो लोक ले
उसी का तंत्र।

( 2 )
लोक तंत्र ,
इहलोक तक
परलोक का
विचार नहीं।

( 3 )
लोकतंत्र ,
लोक का तंत्र
या लोक से
ऊपर तंत्र।

( 4 )
शेर अकेला हो तो उसकी
दहाड़ के सामने भी आवाज़
उठा देते हैं लोग।
झुण्ड में भेड़-बकरिया हों तो
उनकीं हाँ में हाँ मिलाते हैं वही लोग।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on November 11, 2017 at 9:18am
आभार एवं धन्यवाद , आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , सादर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 10, 2017 at 8:56pm

विजय सर , बेहतरीन कटाक्ष

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 10, 2017 at 10:04am
आभार एवं धन्यवाद आदरणीय सलीम रज़ा रेवा जी , सादर।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 9, 2017 at 12:08pm
आदरणीय सुंदर रचना के लिए बधाई,
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 9, 2017 at 9:40am
आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , जी बिलकुल यही वजह है भ्रमित होने की। बड़े बड़ी बातों की छोटी छोटी बारीकियों को न समझने के कारण। यहां तक कि जो इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं वे भी इसका सही अर्थ समझने की कोशिश नहीं करते हैं। आपकी उपस्थिति एवं प्रशिस्त के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Samar kabeer on November 8, 2017 at 9:01pm
आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,लोक तंत्र के मुंह पर तमांचा मारती बहुत उम्दा क्षणिकाएँ लिखी हैं आपने,ये शब्द सिर्फ़ कहने सुनने में ही अच्छा लगता है,वास्तव में कहीं इसका अता पता नहीं मिलता,मिसाल के तौर पर अगर आज कोई बच्चा हमसे ये सवाल पूछ ले तो हम इस लायक़ भी नहीं हैं कि उसे इसकी सही परिभाषा बता सकें,इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2017 at 6:39am
आदरणीय मोहित मिश्र जी , नमस्कार , रचना को मान देने के लिए आपका आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2017 at 6:37am
आदरणीय काली प्रसाद मंडल जी , आपकी सादर उपस्थिति एवं सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए आभार एवं धन्यवाद, सादर।

J
Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2017 at 6:37am
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी , नमस्कार , आपकी मनीषा अभिव्यक्ति के लिये बहुत बहुत धन्यवाद। इतिहास की विश्लेषणात्मक दृष्टि से देखें तो अभी हमारे यहां पूर्ण रूप से विकसित हुआ ही नहीं है। बिना समिष्टि के विकास के लोकतंत्र पूर्ण कैसे होगा। आभार , सादर।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 7, 2017 at 2:50pm

बहुत सुन्दर अंतिम परिभाषा , बधाई आपको आ विजय शंकर जी 

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