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munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आए नहीं वो रात हुए नीमजां से हम दर पे टिकी निग़ाहें संगे आस्ताँ से हम इस ज़िन्दगी से दूर चले बन धुँआ से हम अब मौत आ उदास हुए अब यहाँ से हम दिन रात हादसों में कोई कैसे अब पले देते रहे हैं रोज मगर इम्तिहां से हम लूटा हमारे ख़ास ने कुछ भी न कह सके चुप…"
Sep 24
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"दिल में झांका रब को देखा तो लगे शाहाना हमजां तो ठहरी झूठी रखते ,रब से अब याराना हम जां छिड़कती थी वो हमपे हम भी तो सौदाई थेथे कभी मशहूर दोनों शम्मा वो परवाना हम इक सियासत पर था गुस्सा दूजे थोड़े सादे थे रफ़्ता-रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़साना हम हंस के…"
Jul 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"जनाब समर कबीर साहिब अब देखिएगा दिल में झांका रब को देखा तो लगे शाहाना हमजां तो ठहरी झूठी रखते ,रब से अब याराना हम जां छिड़कती थी वो हमपे हम भी तो सौदाई थेथे कभी मशहूर दोनों शम्मा वो परवाना हम इक सियासत पर था गुस्सा दूजे थोड़े सादे थे रफ़्ता-रफ़्ता बन…"
Jul 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"दिल में झांका रब को देखा तो लगे शाहाना हमजां तो ठहरी झूठी रखते ,रब से अब याराना हम जां छिड़कती थी वो हमपे हम भी तो थे सौदाईथे कभी मशहूर दोनों शम्मा वो परवाना हम इक सियासत पर था गुस्सा दूजे थोड़े सादे थे रफ़्ता रफ़्ता बन गए इस अहद का अफ़साना हम हंस के…"
Jul 28
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय अजय जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"पेट की ख़ातिर सने रहते हैं मिट्टी धूल मेंवक़्त अब मिलता नहीं हमको सँवरने के लिए वाह - वाह आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय आज़ी तमाम जी बहुत खूबसूरत गजल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"  बंदिशे होंगी कई सारी अभी कुछ रोज़ तो फिर मिलेंगे लाख मौके भी सँवरने के लिए वाह - वाह  आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"बैठे बैठे यूँ किनारे पर गुहर मिलते नहींहौसला भी चाहिए गहरे उतरने के लिए वाह - वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय मोहम्मद अनीस अरमान जी धन्यवाद ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीया राजेश कुमारी जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय अशोक कुमार जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय सालिक गणवीर जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय संजय शुक्ला जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी मेहरबानी ,शुक्रिया "
Jun 26
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-132
"आदरणीय लक्मण धामी मुसाफिर जी मेहरबानी ,शुक्रिया"
Jun 26

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

Continue

Posted on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
Continue

Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

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At 10:04pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया आपका मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा ह्रदय से आभार
At 11:07pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीस तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया तहे दिल से मेरा हौसला बढ़ाने के लिए
At 9:36pm on March 23, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

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"आदरणीय अखिलेश भाईजी, आपकी उपस्थिति तथा प्रतिभागिता के लिए हार्दिक बधाई.  की और कि को लेकर आ०…"
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"आदरणीय अखिलेश भाईजी, उस हिसाब से फस्ल भी हिन्दी में प्रचलित नहीं है. यह फसल ही है. "
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