For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

सादर अभिवादन ।

पिछले 111 कामयाब आयोजनों में रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर बड़े जोशोखरोश के साथ बढ़-चढ़ कर कलम आज़माई की है. जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी सिलसिले की अगली कड़ी में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112

विषय - "विषय मुक्त" (अर्थात इस बार का आयोजन विषय से मुक्त रखा गया है)

आयोजन की अवधि- 08 फरवरी 2020, दिन शनिवार से 09 फरवरी 2020, दिन रविवार की समाप्ति तक

(यानि, आयोजन की कुल अवधि दो दिन)

बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
नज़्म
हाइकू
सॉनेट
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.

रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

(फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 08 फरवरी 2020, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा)

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
मिथिलेश वामनकर
(सदस्य कार्यकारिणी टीम)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम

Views: 544

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

शुक्रिया भाई छोटेलाल जी।

आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई।

चल पाहुन के हाथों में
शगुनों की मौली बांधें ,
बंध जाए शायद डोरी में
टुकड़ा उड़ते बादल का ।।

दे आंचल की ओट जरा
नीरांजन थाल संजोएं ,
चौक पुराएं सुधि रंगों से
मंगल गीत गवाएं ।
रश्मित हो शशि किरणों से
कोना गृह के आंगन का ,
रंजित हो शायद नव रंगों से
ये कोर किनारा आंचल का ।।

चल सुधियों की चौखट पर
तोरण द्वार लगाएं ,
चुन चुन कर आंसू के मोती
वन्दनवार सजाएं ,
सूनी कुटिया के द्वारे
भूले से साजन आए ,
धूलिकणों में खोया जो
शायद मिल जाए रतन
मन चंचल का ।।

मौलिक व अप्रकाशित

जनाब कनक हरलालका जी आदाब,बहुत सुंदर रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

आदरणीय समीर कबीर साहब .हार्दिक आभार आपका रचना पर प्रोत्साहित करने के लिए.

आदरणीय कनक हरलालका जी बहुत बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएं

आ 0 छोटे लाल जी हार्दिक आभार रचना पर सकारात्मक समीक्षा हेतु।

चल पाहुन के हाथों में
शगुनों की मौली बांधें ,
बंध जाए शायद डोरी में
टुकड़ा उड़ते बादल का//  बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ। हार्दिक आदरणीया कनक जी 

प्रतिभा जी बहुत बहुत आभार रचना पर प्रोत्साहन देने वाली टिप्पणी के लिए ।

चल सुधियों की चौखट पर, तोरण द्वार लगाएं ,
चुन चुन कर आंसू के मोती, वन्दनवार सजाएं ,

आ. कनक जी बेहतरीन प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।

आदरणीय कनक हरलालका जी उम्दा पेशकश के लिए बधाई स्वीकारें । 

आजकल (अतुकान्त)
**********
उसे चुपचाप बैठा देखकर 
वो सब उसके पास 
खसक आये 
 " तुझे मारा ना? 
बोल !बोल !
डर मत हम आ गये हैं 
 चल उठ" 
उन्होने झंकझोरते हुए 
उसका हाथ खींचा
वो दर्द से चीख उठा

 "देखो ! देखो ! बिचारे को

 कितना मारा है"

 उन्होने सिसकारी भरी
 "तुम्हारे दिये हुए
पुराने घाव हैं ये तो
जो टीस रहे हैं  आज तक
भरते ही नहीं "
संविधान धीरे  से बोला
***************************
मौलिक व अप्रकाशित

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सराहना के लिए हार्दिक आभार ।"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"जी कृप्या पहली पंक्ति यूँ पढ़ें: दुनिया के गुलिस्ताँ में फूल सब हसीं हैं पर"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, इस लाजवाब ग़ज़ल पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ!"
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
2 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

रिमझिम - रिमझिम बदरा बरसे

रिमझिम - रिमझिम बदरा बरसेअजहूँ न आए पिया रे..ये बदरा कारे - कजरारे बार- बार आ जाएँ दुआरेघर आँगन सब…See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२२/२१२लेके आया फिर से बचपन शायरी का सिलसिलामौत से कह दो  न  रोके  जिन्दगी का…See More
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212 / 1222 / 212 / 1222दुनिया के गुलिस्ताँ में मुल्क सब हसीं हैं परएक मुल्क ऐसा है जो बला का है…See More
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( आएगी कल वफ़ात भी तू सब्र कर अभी...)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी हाज़िरी और सराहना के लिए ह्रदय से आभार व्यक्त…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लोटा है साँप फिर से जो उसके कलेजे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लोटा है साँप फिर से जो उसके कलेजे पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आ. भाई विजय शंकर जी सादर अभिवादन। उत्तम रचना हुई है। हार्दिक बधाई ।"
9 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service