For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....

प्रिय सदस्य गण / प्रबंधन समिति के सदस्य गण / ओ बी ओ के सभी पाठक एवं शुभचिंतक गण

सादर प्रणाम

आप सभी अवगत हैं कि ओ बी ओ वर्ष 2010 से अनवरत चलते हुए 16 वर्ष से अधिक समय व्यतीत कर चुका है, जो प्रारंभ होता है उसका कभी न कभी अंत भी होता है. 

बहुत ही दुःख और कष्ट के साथ अब ओबीओ को बंद करने का निर्णय लेना पड़ रहा है जिसके पीछे महत्वपूर्ण कारक निम्न हैं...

  • सदस्यों का नगण्य उपस्थिति
  • प्रबंधन सदस्यों के पास समय की कमी
  • संचालन शुल्क में अत्यधिक वृद्धि
  • मासिक संचालन व्यय का संस्थापक द्वारा अकेले अब और वहन करने में असमर्थता
  • अन्यान्य

अतः आप सभी से अनुरोध है कि दिनांक 31 मई 2026 के पूर्व आप अपने साहित्यिक सामग्रियों को कॉपी/पेस्ट कर अपने पास संरक्षित कर लें. 

सादर

ई.गणेश जी बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक

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 सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव:

1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका स्मारिका को अर्द्धवार्षिक पत्रिका का रूप दिया जा सकता है जिसमें अब तक की ओबीओ गोष्ठियों/समूहों/ब्लॉग्स में प्रकाशित चयनित उत्कृष्ट या सभी अप्रूव्ड रचनाओं को लेखक परिचय या संक्षिप्त साक्षात्कार सहित व्यापक स्तर पर प्रकाशित किया जाये। सहयोग राशि में पत्रिका प्रकाशन और वेबसाइट मेंटिनेंस ख़र्च शामिल रहेगा। न्यूनतम या समुचित राशि में सदस्यों में ख़र्च आपस में बॅंट जायेगा।

2- लिखित और वीडियो साक्षात्कार और वीडियो रचना पाठ के बारे में विचार किया जाये किसी प्लेटफार्म (गूगल मीट, स्ट्रीमयार्ड, ज़ूम आदि) का उपयोग करते हुए। इसके लिए मासिक कलैंडर में सूचना दी जा सकती है।

3- एक समूह/गोष्ठी केवल साहित्य के या साहित्यप्रेमी छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों का भी हो, सभी विधाओं के लिए एक ही। न्यूनतम आयु 16 या 18 वर्ष।

4- सोशल मीडिया से लिंक्ड/शेअर्ड रहें मंच के प्रमुख आयोजन।

जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग लगातार आते गए और काम करते गए। कविता कोश की तरह आर्थिक समस्या को खुले योगदान के माध्यम से हल किया जा सकता है। विकिपीडिया तक ऐसे चल रहा है। समस्याएं तो हर जगह आती हैं। बंद करना उनका समाधान नहीं है और अगर यहाँ से सीखकर लोगों ने अपने अपने मठ बनाए हैं तो ये तो गर्व की बात है जैसे पिता के लिए पुत्र का आगे  बढ़ना। अंत में मंच का उद्देश्य भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाना ही तो है। 

और https की समस्या को वेबसाइट का यातायात cloudflare से गुजारकर मुफ़्त में हल किया जा सकता है।  आजकल असुरक्षित वेबसाइट बहुत जगह नहीं खुलती विशेषकर कार्यालयीन संगणकों पर। ये भी एक समस्या हो सकती है लोगों के दूर जाने की।

 

उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी है, आदरणीय धर्मेन्द्र जी. 

जय-जय 

 आदरणीय सौरभ साहब, 

अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त न हो और सतत प्रवाहमान बना रहे ।

सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय .. 

आप भी अपने बिन्दु रखें। 

सादर 

  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा  ओ.बी.ओ को.प्रवहमान रखने का संकल्प  दृढ़ है तो,  कोई समाधान निकल  ही आयेगा । समस्या व्यय सम्बन्धी / आर्थिक है तो सदस्य  मिलकर वहन कर सकते है। जहाँ तक सहभागिता का प्रश्न  है, तो साहित्य / काव्य से अनुराग रखने वाले अवश्य सक्रिय रहेंगे, ऐसी मेरी मान्यता है !

...
Dear respected Admin team:
A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was posted. Here is another attempt.

I visited OBO a couple of days ago after a long gap, and I was very saddened.

If I understand it right, Bhai Usmani ji's suggestion has 2 aspects, viz (a) a magazine and (b) an on-going website as at present.
I believe that only (b) will suffice. In this regard, Admin can estimate annual expenditure to run/maintain the website, divide it by the # of expected stable members, add 20% to it for possible over-runs and to build a "reserve fund" for the future. Offer this membership proposal to all members, giving them a 2 to 3 week deadline to send their annual dues. In the future, 2 months before end of operating year, each year, estimate the new prevailing cost for the following year, and accordingly, assess new membership cost. This sounds workable in order to keep esteemed OBO going.
I am open to discuss/amend my suggestion based on response.

atyant dukahd 

सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।

🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक सुझाव🌹
==============================================================

यह जानकर अत्यंत दुःख हुआ कि लगभग 15–16 वर्षों की अतुलनीय साहित्यिक सेवा के बाद OBO को बंद करने की परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। यह केवल एक साहित्यिक पटल के बंद होने का प्रश्न नहीं है, बल्कि उस साझा साहित्यिक यात्रा के संभावित अंत का संकेत है, जिससे मेरे जैसे हज़ारों साहित्यप्रेमियों ने लाभ प्राप्त किया है।

इस अवसर पर गणेश बागी जी विशेष साधुवाद और हार्दिक सम्मान के पात्र हैं। उन्होंने इन 15–16 वर्षों के दौरान जिस समर्पण, धैर्य और व्यक्तिगत प्रयासों के बल पर इस पटल को संचालित किया, वह निस्संदेह प्रशंसनीय और अनुकरणीय है। उनके योगदान को केवल धन्यवाद के शब्दों में सीमित करना इस सेवा की व्यापकता को कम करके आँकना होगा।

मेरी सभी साहित्यप्रेमियों, सदस्यों और OBO से जुड़े साथियों से विनम्र, किंतु दृढ़ अपील है कि हम इस पटल को बंद होने से बचाने के लिए सामूहिक चिंतन, ठोस पहल और हर संभव व्यावहारिक प्रयास करें।

मेरा मानना है कि इच्छाशक्ति, पारदर्शी व्यवस्था और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ OBO को एक नए, अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ स्वरूप में पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसी दृष्टिकोण से मैं अपने कुछ सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ:

1️⃣ सदस्यों की सामूहिक आर्थिक भागीदारी

---------------------------------------------------

OBO से जुड़े 3000 से अधिक सदस्यों में से यदि केवल 500 सदस्य भी आगे आकर न्यूनतम ₹200 प्रतिमाह का नियमित योगदान देने का संकल्प लें, तो पटल के संचालन के लिए ₹1,00,000 मासिक संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

यह राशि सामान्य मोबाइल रिचार्ज के मासिक खर्च की तुलना में भी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन सामूहिक रूप से यह संस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

इसके लिए आवश्यक हो तो संस्था का विधिवत पंजीकरण कराया जाए, बशर्ते वह पहले से पंजीकृत न हो। आर्थिक योगदान की व्यवस्था पारदर्शी, स्वैच्छिक और स्पष्ट जवाबदेही पर आधारित हो।

2️⃣ संस्था के ढाँचे का सरलीकरण

-------------------------------------------

संस्था की प्रशासनिक संरचना को अनावश्यक जटिलताओं से मुक्त करते हुए इसे अधिक प्रभावी और कार्योन्मुख बनाया जाए।

मेरा सुझाव है कि संरचना में केवल दो प्रमुख निकाय हों:

🔹 जनरल बॉडी (General Body)

🔹 गवर्निंग बोर्ड (Governing Board)

सरल ढाँचा निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुगम बनाने और उत्तरदायित्व को स्पष्ट करने में सहायक हो सकता है।

3️⃣ अवैतनिक CEO की नियुक्ति

----------------------------------------

एक ऐसे समर्पित और सक्षम *अवैतनिक CEO* की नियुक्ति की जाए, जो साहित्य के प्रति अपनी सेवाएँ जारी रखने के साथ-साथ संस्था के बिजनेस डेवलपमेंट, संसाधन जुटाने, साझेदारी निर्माण और संस्थागत विकास की जिम्मेदारी भी संभाल सके।

इस पद के लिए साहित्यिक प्रतिबद्धता के साथ प्रबंधन क्षमता, नेतृत्व कौशल और परिणामोन्मुख कार्यशैली को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

4️⃣ नेतृत्व में संक्रमण और नए चेहरों का अवसर

---------------------------------------------------------

संस्था के पुराने पदाधिकारियों को अब तक दी गई उनकी सेवाओं के लिए सम्मानपूर्वक हार्दिक धन्यवाद दिया जाए और उन्हें वर्तमान दायित्वों से मुक्त करते हुए नेतृत्व में नए चेहरों को अवसर प्रदान किया जाए।

यह किसी के योगदान को कमतर आँकने का प्रयास नहीं, बल्कि संस्थागत निरंतरता, नई ऊर्जा और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप नेतृत्व के विकास की दिशा में एक कदम हो सकता है।

5️⃣ अनुभवी एवं कर्मठ लोगों की भूमिका

-------------------------------------------------

ऐसे पुराने सहयोगियों को भी गवर्निंग बोर्ड में स्थान दिया जाए, जिन्होंने संस्था और पटल के विकास में अप्रतिम योगदान दिया है।

इस संदर्भ में श्री समर कबीर जैसे अनुभवी और समर्पित व्यक्तियों के योगदान पर विचार किया जा सकता है।

हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो केवल पद धारण न करें, बल्कि अपनी सक्रिय भागीदारी, अनुभव और कार्यक्षमता से संस्था को आगे बढ़ाएँ।

पद की गरिमा उसके नाम से नहीं, बल्कि उससे जुड़े उत्तरदायित्व और वास्तविक योगदान से निर्धारित होती है।

6️⃣ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संस्थागत एकीकरण

--------------------------------------------------------------

बदलते समय और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए OBO के कार्यों के सफल संचालन में Artificial Intelligence (AI) के एकीकरण की दिशा में गंभीर और योजनाबद्ध प्रयास किए जाएँ।

AI का उपयोग साहित्यिक सामग्री के प्रबंधन, शिक्षण-सहायता, संचार, अभिलेखीकरण, सदस्य सहभागिता और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा सकता है।

हालाँकि, साहित्यिक गुणवत्ता, मानवीय रचनात्मकता और संपादकीय विवेक को केंद्र में रखते हुए AI का जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए।

7️⃣ पुनर्गठन के लिए दो वर्ष का समय

--------------------------------------------

नए गवर्निंग बोर्ड और CEO को कम से कम *दो वर्षों का स्पष्ट कार्यकाल* दिया जाए, जिसके दौरान वे संस्था को पुनर्जीवित करने, आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने, कार्यप्रणाली में सुधार लाने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में अथक प्रयास करें।

इस अवधि के लिए स्पष्ट लक्ष्य, कार्ययोजना, नियमित समीक्षा और पारदर्शी प्रगति रिपोर्ट की व्यवस्था हो, ताकि संस्था के पुनर्गठन के प्रयासों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सके।

---

🌹 अंत में मेरी विनम्र अपील

--------------------------------------

OBO केवल एक ऑनलाइन पटल नहीं है। यह उन साहित्यिक संबंधों, सीखने-सिखाने की परंपराओं और रचनात्मक संवादों का साझा मंच है, जिसने अनेक लोगों को अपनी साहित्यिक यात्रा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

किसी संस्था को बचाने का सबसे प्रभावी तरीका केवल भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी, स्पष्ट कार्ययोजना और उसे क्रियान्वित करने की इच्छाशक्ति है।

आइए, हम इस संकट को अंत के रूप में नहीं, बल्कि एक नए आरंभ के अवसर के रूप में देखें। यदि हम सब अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने के लिए तैयार हों, तो OBO के भविष्य पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

गणेश बागी जी की वर्षों की सेवा को सम्मान देने का एक सार्थक तरीका यह भी हो सकता है कि हम इस मंच को एक अधिक सुदृढ़, समावेशी और टिकाऊ संस्थागत स्वरूप देने का प्रयास करें।

OBO को बचाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सभी की साझा जिम्मेदारी है जो इससे जुड़े रहे हैं और इसके अस्तित्व को मूल्यवान मानते हैं।

सादर,

मनोज कुमार सिन्हा 'राज़' नवादवी
भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत

🙏🌹🙏❤️

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