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पुस्तक समीक्षा Discussions (112)

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शफ़क--राजकुमारी नायक का कविता संग्रह

श्रीमती राजकुमारी नायक का काव्य संग्रह शफ़क  जब हमारी लेखिका संघ की अध्यक्षा आ. अनिता सक्सेना जी ने मुझे सौंपा तो यह मेरे लिए एक नई चुनौती ल…

Started by नयना(आरती)कानिटकर

0 Aug 23, 2017

‘करो परिष्कृत अंतर्मन को’- काव्य की आत्मा से एक संवाद

(कवयित्री माधवी मिश्रा  की पुस्तक  ‘करो परिष्कृत अंतर्मन को’  की संवाद शैली में आलोचना )                            ‘करो परिष्कृत अंतर्मन क…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Jun 26, 2017

पुस्तक समीक्षा : लक्ष्मण की कुण्डलियाँ

समीक्षक : अशोक कुमार रक्ताले.         आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी कविताई तो लम्बे समय से कर रहे हैं किन्तु उन्होंने छंद रचनाएं करना प…

Started by Ashok Kumar Raktale

3 Mar 17, 2017
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

‘पृथ्वी के छोर पर’- अभियान और अनुभूति का एक रोमांचक दस्तावेज - डॉ0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

हिन्दी साहित्य की गद्याधारित विधाओं में नाटक, उपन्यास, कहानी और निबंध के बाद जीवनी आत्म-कथा, संस्मरण, यात्रा वृत्तांत, रहस्य-रोमांच के इतिव…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

0 Mar 16, 2017

"कुंडलिया छंद के नये शिखर" संकलन की समीक्षा

 श्री त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी द्वारा सम्पादित “कुंडलिया छंद के नये शिखर” में 14 कुण्डलियाकारों के कुंडलिया छंद है | इन छन्दों के बारे में…

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

2 Dec 19, 2016
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

समीक्षा : “अब किसे भारत कहें” एक कुण्डलिया छंद संग्रह.

    “अब किसे भारत कहें” नाम देखकर तो लगा न था की यह कोई कुण्डलिया संग्रह होगा. किन्तु यह डॉ. रमाकांत सोनी जी का जुलाई-१६ में प्रकाशित कुण्…

Started by Ashok Kumar Raktale

0 Nov 24, 2016

छन्द काव्य संकलन ”करते शब्द प्रहार“ पुस्तक के विमोचन पर उदगार -

दिनांक 12 अक्तूबर, 2016 को छन्द काव्य संग्रह “करते शब्द प्रहार” पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कलानाथ जी शास्त्री में कहाँ कि दोहों में जि…

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

4 Oct 27, 2016
Reply by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

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सार्थक प्रस्तुतीकरण हेतु सोच को भी संश्लेषित होना होता है // -सौरभ

युवा कवि अरविन्द की कई कविताओं से गुजरने का संयोग बना है। ऐसे किसी संयोग का बनना मेरे जैसों के लिए सौभाग्य है। आजके कवियों की अंतर्दशा और व…

Started by Saurabh Pandey

0 Sep 14, 2016

सदस्य टीम प्रबंधन

छन्दों के प्रति उत्कट आग्रह के साथ सतत क्रियाशील रहना कई अर्थों में महत्त्वपूर्ण है

सार्थक रचनाकर्म शाब्दिक अभिव्यक्ति मात्र नहीं होता, बल्कि यह एक सुगढ़ काव्य-अनुशासित भाव-संप्रेषण है । रचनाकर्म भावुक किन्तु आग्रही अभिव्यक्…

Started by Saurabh Pandey

3 Sep 3, 2016
Reply by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"

सदस्य टीम प्रबंधन

ज़हीर कुरेशी की ग़ज़लें विविध आयामी सोच तथा भाषायी व्यवहार के कारण ही नयी ऊँचाइयाँ तय कर पाती हैं // --सौरभ

कई विधाएँ, विशेषकर पद्य विधाएँ हैं, जो भाषा विशेष की गोद में जन्म अवश्य लेती हैं, और तदनुरूप पल्लवित भी होती हैं । परन्तु, कालांतर में अपनी…

Started by Saurabh Pandey

0 Jul 19, 2016

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Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

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