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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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मुख्य प्रबंधक

जलहरण घनाक्षरी : आम आदमी (भोजपुरी )

जलहरण घनाक्षरी : आम आदमी (भोजपुरी ) चकरी में जोरू संग, दराला आम आदमी, रोज-रोज चउक प, बिकेला आम आदमी |खाली बस चुनाव में, आवेला उ धियान में,ज…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

14 Oct 12, 2012
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

भाई भोजपुरिया हो भाई भोजपुरिया ,

  भाई भोजपुरिया हो भाई भोजपुरिया ,कर ना तुही कुछ जोगार ना त देसवा बिरान हो जाई ,अठारह स संतावन या उनीस स बेआलिस हो ,पड़ल बा तहरे दरकार ना त…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Oct 12, 2012
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

चला ना नेतवा से पुछाई ,

तन मन धन के , दे द तू वतन के , चला ना नेतवा से पुछाई , कल तक भूखे मरत रहलिस , तोरा बाप इहा का आइल , वापस कर इ दौलत वतन के , ना त मुह पे काल…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Oct 12, 2012
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

मुख्य प्रबंधक

भोजपुरी लघु कथा :- चुनाव के बात अलग होला

"हुजुर माई बाप, हम बहुत अफदरा में पड़ल बानी, मदद करीं, अब त एगो राउरे सहारा बा", मोहन लाल के मेहरारू सुरसतिया विधायक जी से गिड़गिड़ात एके स…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

22 Sep 28, 2012
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

मुख्य प्रबंधक

बात जवन भुलाला ना ( शिक्षक दिवस पर विशेष )

बात जवन भुलाला ना ( शिक्षक दिवस पर विशेष )  जिनगी में कभो कभो अइसन घटना घट जाला जवना के आदमी भुला ना पावे, बात आज से २३ बरिस पहिले के ह वोह…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

5 Sep 5, 2012
Reply by Saurabh Pandey

गोरी बस गइलू हमरी नजरिया में

पहिले हम केतना सही से रहलीं, दिल रहे केतना साफ़| देख के तू मुश्कियइलू  अइसन, दिल पर लिख दिहलू नाम| पहिले देखलू त तूहीं हमके आँख भर के,  ग…

Started by आशीष यादव

7 Jun 26, 2012
Reply by आशीष यादव

काहे रे जीवनबैरी जीवनबैरी पी ,

काहे रे जीवनबैरी जीवनबैरी पी ...   बच्चन के कपडा फाटल फाटल , पडल बाड तू गटर गटर ,  छोड़ के इ तू बढ़िया से जी , काहे रे जीवनबैरी जीवनबैरी प…

Started by Rash Bihari Ravi

16 Jun 4, 2012
Reply by Deepak Sharma Kuluvi

मुख्य प्रबंधक

निर्गुण भोजपुरी गीत : पिया अईले बोलावे

निर्गुण भोजपुरी गीत : पिया अईले बोलावे छोडे के नईहर तैयार हो, पिया अईले बोलावे, मनवा होखेला बेकरार हो , पिया से मिले के बावे , छोडे के नईह…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

25 Apr 22, 2012
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

चला हो, दिया पूरा हो!

अनिहार बहुत बढ़ गईल, चला हो, दिया पूरा हो!  (अनिहार: अंधेरा) बर्थ-डे मनय, स्कूल खरतिन बजट नाही, महगाई कुल छोरि लियेय, कौड़ी बचत नाही. काव…

Started by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी'

2 Apr 6, 2012
Reply by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी'

ई कइसन समाज ?

पूर्व प्रकाशित रचना होने के फलस्वरूप ओ बी ओ नियमानुसार इस पोस्ट को प्रबंधन स्तर से हटा दिया गया है | (२५ मार्च १०.३५ am) एडमिन 2012042501

Started by Brij bhushan choubey

1 Mar 24, 2012
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

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"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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