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धार्मिक साहित्य Discussions (168)

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नवरात्रे दोहे

दिव्य स्वरूपी संस्थिता ,इष्ट अलौकिक शक्ति|  शारदीय नवरात्र में ,शैल सुता की भक्ति||   ब्रह्मलोक संचालिका ,ब्रह्मचारिणी मात्र| ध्यान ज्ञान आ…

Started by rajesh kumari

0 Oct 1, 2014

जयतु मातु

द्रुतविलम्बित छंद।।।,  ऽ।।,  ऽ।।,  ऽ। ऽ.................................जयतु मातु दया सुख दायनीभगत वत्सल शोक विनाशनीजगत मातु दया तुम कीजिये…

Started by रमेश कुमार चौहान

0 Sep 30, 2014

हे गजानन

वसन्तिलका वर्णिक छंदऽ ऽ  । ऽ ।  ।  ।ऽ  ।  । ऽ  । ऽ ऽहे वक्रतुण्ड़ गण नायक विघ्नहारी। हे पार्वती तनय भक्तन हीतकारी।।हे वर्ण अक्षर रूपा प्रभु…

Started by रमेश कुमार चौहान

1 Sep 30, 2014
Reply by rajesh kumari

उपालंभ वंदना

           (गणेश का कथन पार्वती से ) देखो मातु, शारदा है आपकी विचित्र अति मेरी  लेखनी  का  अंग-भंग  कर  देती है I   चिन्तना में डूबता हूँ…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

3 Sep 30, 2014
Reply by rajesh kumari

दोहे (प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा )

दोहे (प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा ) वंदना श्री गणेश जी , वंदहु श्री हनुमान वंदना माँ सरस्वती , दीजिए विद्या दान माधव चरण शीश धरे, अर्जुन माँग…

Started by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA

3 Sep 30, 2014
Reply by rajesh kumari

श्रीकृष्ण स्मरण

जन्माष्टमी पर विशेष                                                         मनमोहन  माधव मधुसूदन I वात्सल्य रसामृत से जिनके ब्रज का आप्यायि…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

5 Sep 30, 2014
Reply by rajesh kumari

गणेशाष्‍टक

धरा सदृश माता है माँ की परिकम्मा कर आये। एकदन्‍त गणपति‍ गणनायक प्रथम पूज्‍य कहलाये।।1।।   लाभ-क्षेम दो पुत्र ऋद्धि-सि‍द्धि‍ के स्‍वामि गजान…

Started by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

1 Sep 30, 2014
Reply by rajesh kumari

दोहे // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा //

दोहे // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा //-------------------------------------राम नाम लिये बगैर करते हैं जो काज जीवन सदा दुखी रहे जान लीजिये राज…

Started by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA

0 Aug 2, 2014

बाबा की महिमा

बसे है वो पहाड़ो में वहीं सबको बुलाते है बुला कर पास अपने वो सभी का गम मिटाते हैं।। सजा है काफिला कैसा कभी आ कर जरा देखो कठिन है राह फिर भी…

Started by Akhand Gahmari

0 Jul 20, 2014

माँ के चरणों मे कुछ छन्न पकैंया छंद -- (प्रथम प्रयास)

छन्न पकैंया छन्न पकैंया माँ की जोत जलाऊँ |मेवा कदली लौंग लाइची उनको भोग लगाऊँ || छन्न पकैंया छन्न पकैंया छम छम पायल बाजे |जयकारा मइया का गा…

Started by Meena Pathak

2 Apr 8, 2014
Reply by Meena Pathak

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Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Tuesday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
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"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
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"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
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Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
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Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
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सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
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