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Poonam Matia
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Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"अच्छे अशआर हुए.........मुबारक खँडहर देख लें    "
Jun 28, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"आदरणीय दयाराम जी शुक्रिया  हौसला अफज़ाई केलिए       "
Jun 28, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"जी अबपोस्ट की ग़ज़ल  गिरहके  साथ        "
Jun 28, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"सुलगता रहा इक शरर धीरे धीरे जलाता रहा वो ये घर धीरे धीरे मचाया हवाओं ने कुहराम ऐसा गिरा टूट कर हर समर धीरे धीरे दिये ज़ख़्म नफ़रत ने फिर फिर हमें जब मुहब्बत के सूखे शजर धीरे धीरे न सोचा न समझा मगर जो उठाया हुआ हर क़दम बे असर धीरे धीरे फलक पर…"
Jun 28, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"धन्यवाद  श्रोतिया जी....लगभग पाँच वर्ष बाद ओ बी ओ     पर अपनी हाज़िरी दी है    "
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"जी, गिरह का शे'र    ग़ज़ल से अलग रहेगा बस यही अड़चन रोक रहीहै          "
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"निखर जायेंगे कम हुनर धीरे-धीरेअच्छा कहा अजेय जी         "
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"नमस्कार आभार आपने ग़ज़ल पर चर्चा की।  पहुंचे नहीं पहुंचें लिखा है अर्थात पहुंचेंगे। फिर भी आपके दोनों सुझाव स्वीकार्यीय हैं। धन्यवाद। ग़ज़ल दोबारा पोस्ट करूं? सादर।"
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण जी    "
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"जी "
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"सुलगता रहा इक शरर धीरे धीरे जलाता रहा वो ये घर धीरे धीरे मचाया हवाओं ने कुहराम ऐसा गिरा टूट कर हर समर धीरे धीरे दिये ज़ख़्म नफ़रत ने फिर फिर हमें जबमुहब्बत के सूखे शजर धीरे धीरे न सोचा न समझा मगर जो उठाया हुआ हर क़दम बे असर धीरे धीरे फलक पर क़दम थे,…"
Jun 27, 2025
Poonam Matia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-180
"नमस्कारक्या तरही मिसरे में लिंग अनुसार बदलाव करसकते हैंक्यूंकि उसे मैं अपने अनुसार प्रयोग कररहीहूँ?                    "
Jun 27, 2025
Poonam Matia commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"धन्यवाद  @सूबे सिंह जी ........ कोरोना पर काफ़ी कुछ लिख डाला हाल ही में"
Apr 9, 2020
सूबे सिंह सुजान commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"पूनम माटिया जी करोना पर अच्छी रचना हुई है बहुत बहुत बधाई हो "
Mar 22, 2020
Poonam Matia commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"नमस्कार ! बहुत समय बाद ओ बी ओ में कुछ नया पोस्ट किया | आ.@लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी और आ.समर कबीर जी आपके द्वारा मिले प्रोत्साहन-पुष्पों  के लिए हृदयतल से आभार"
Mar 19, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"आ. पूनम जी, सादर अभिवादन । वर्तमान परिप्रेक्ष में अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 17, 2020

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Female
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New Delhi
Native Place
New Delhi
Profession
teaching,painting ,writing
About me
love to be jst a free bird

Poonam Matia's Blog

मुक्तक -कोरोना

किसी की जां पे बन आई, किसी को खेल कोरोना

नहीं मुश्किल, बहुत आसान अपने 'हाथ ही धोना'


कि छोटी-छोटी बातों को रखो तुम ध्यान में अपने

रहेगा दूर फिर हमसे विदेशी रोग का रोना

चलो छोड़ो गले मिलना,'नमस्ते' ही को अपनाओ

बढ़ाओ अपनी क्षमता और 'शाकाहार' ही खाओ…

Continue

Posted on March 15, 2020 at 1:00am — 5 Comments

मेरे कान्हा

मुश्किल में हूँ कान्हा

कैसे तोहे नैनों में बसाऊँ

मेरे श्याम सांवरे

कैसे तोहे मीठे बैन सुनाऊं

कभी तेरे कुंडल मोहें मोहे  

कभी माथे की बिंदिया

कभी तेरी बंसी छेड़े मोहे 

कभी अँखियाँ छीने निंदिया

मुश्किल में हूँ कान्हा

कैसे तोहे नैनों में बसाऊँ

लाल-पीली पगड़ी पे कान्हा

मोती बन माथे पे लटक जाऊं

कभी होठों की लाली मोहे मोहे  

कभी भाल का चन्दन

कभी तेरी बतियां सोहे मोहे 

कभी राधिका…

Continue

Posted on January 15, 2014 at 1:30am — 12 Comments

"हाउसवाइफ कहलाने में शर्म क्यूँ ? यह तो गर्व की बात है"

विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाएं जिस तरह बड़े-बड़े पैकेज (हज़ारों ,लाखों में ) ले रही हैं उसे देख अधिकतर महिलाएं खुद को बहुत नीचा या कमतर समझती है  जब उनसे पूछा जाता है कि वे क्या करती हैं ........और शर्म महसूस करती हैं.यह बताने में कि वे केवल हाउसवाइफ हैं .



यह इसलिए कि हाउसवाइफ का मतलब अक्सर यह समझा जाता है कि या तो वह घर में चूल्हा-चौका करती है या फिर सिर्फ किट्टी पार्टियों में अपना समय व्यतीत करती हैं ....... जबकि वास्तविक स्थिति इसके बिलकुल विपरीत होती है ...अधिकांश महिलाएं…

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Posted on January 14, 2014 at 5:30pm — 22 Comments

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At 2:35am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
तहरीके-ग़ज़ल मोहतरमा पूनम माटिया साहिबा, तहे-दिल से मुहब्बतों का शुक्रगुज़ार हूँ। हालांकि ग़ज़ल तो शुक्रवार को ही तख़्लीक़ हो गई थी मगर पेशावर दुश्वारियों के चलते पोस्ट न कर पाया था।
At 8:30pm on August 20, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आदरणीया पूनम माटिया मेम , ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ये सब आपके और आदरणीय नरेश माटिया सर के निरंतर उत्साहवर्धन, स्नेह  और आशीर्वाद का ही परिणाम है
इसे सदैव मुझ पर यूँ ही बनाए रखिये आपका सदैव आभारी हूँ

At 7:59pm on June 25, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

oh god

                  i just saw that your hobby is also painting very good iam very happy to know all.

keep it up

bravo

At 9:22pm on June 23, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

poonam ji main aapki kavita khoj raha tha par nahin mili?plz tell me how i can read/access them.thanks and regards.

At 6:35pm on January 19, 2012, Admin said…

 
 
 

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