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Poonam Matia
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"धन्यवाद  @सूबे सिंह जी ........ कोरोना पर काफ़ी कुछ लिख डाला हाल ही में"
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सूबे सिंह सुजान commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"पूनम माटिया जी करोना पर अच्छी रचना हुई है बहुत बहुत बधाई हो "
Mar 22, 2020
Poonam Matia commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"नमस्कार ! बहुत समय बाद ओ बी ओ में कुछ नया पोस्ट किया | आ.@लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी और आ.समर कबीर जी आपके द्वारा मिले प्रोत्साहन-पुष्पों  के लिए हृदयतल से आभार"
Mar 19, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"आ. पूनम जी, सादर अभिवादन । वर्तमान परिप्रेक्ष में अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 17, 2020
Samar kabeer commented on Poonam Matia's blog post मुक्तक -कोरोना
"मुहतरमा पूनम मटिया जी आदाब, मुक्तक का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 15, 2020
Poonam Matia posted a blog post

मुक्तक -कोरोना

किसी की जां पे बन आई, किसी को खेल कोरोना नहीं मुश्किल, बहुत आसान अपने 'हाथ ही धोना' कि छोटी-छोटी बातों को रखो तुम ध्यान में अपने रहेगा दूर फिर हमसे विदेशी रोग का रोनाचलो छोड़ो गले मिलना,'नमस्ते' ही को अपनाओ बढ़ाओ अपनी क्षमता और 'शाकाहार' ही खाओ कि 'चुन्नी और गमछा' ही बहुत हैं मुंह को ढकने को हमारी संस्कृति आला इसे उपयोग में लाओपूनम माटियाSee More
Mar 15, 2020

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New Delhi
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New Delhi
Profession
teaching,painting ,writing
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love to be jst a free bird

Poonam Matia's Blog

मुक्तक -कोरोना

किसी की जां पे बन आई, किसी को खेल कोरोना

नहीं मुश्किल, बहुत आसान अपने 'हाथ ही धोना'


कि छोटी-छोटी बातों को रखो तुम ध्यान में अपने

रहेगा दूर फिर हमसे विदेशी रोग का रोना

चलो छोड़ो गले मिलना,'नमस्ते' ही को अपनाओ

बढ़ाओ अपनी क्षमता और 'शाकाहार' ही खाओ…

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Posted on March 15, 2020 at 1:00am — 5 Comments

मेरे कान्हा

मुश्किल में हूँ कान्हा

कैसे तोहे नैनों में बसाऊँ

मेरे श्याम सांवरे

कैसे तोहे मीठे बैन सुनाऊं

कभी तेरे कुंडल मोहें मोहे  

कभी माथे की बिंदिया

कभी तेरी बंसी छेड़े मोहे 

कभी अँखियाँ छीने निंदिया

मुश्किल में हूँ कान्हा

कैसे तोहे नैनों में बसाऊँ

लाल-पीली पगड़ी पे कान्हा

मोती बन माथे पे लटक जाऊं

कभी होठों की लाली मोहे मोहे  

कभी भाल का चन्दन

कभी तेरी बतियां सोहे मोहे 

कभी राधिका…

Continue

Posted on January 15, 2014 at 1:30am — 12 Comments

"हाउसवाइफ कहलाने में शर्म क्यूँ ? यह तो गर्व की बात है"

विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाएं जिस तरह बड़े-बड़े पैकेज (हज़ारों ,लाखों में ) ले रही हैं उसे देख अधिकतर महिलाएं खुद को बहुत नीचा या कमतर समझती है  जब उनसे पूछा जाता है कि वे क्या करती हैं ........और शर्म महसूस करती हैं.यह बताने में कि वे केवल हाउसवाइफ हैं .



यह इसलिए कि हाउसवाइफ का मतलब अक्सर यह समझा जाता है कि या तो वह घर में चूल्हा-चौका करती है या फिर सिर्फ किट्टी पार्टियों में अपना समय व्यतीत करती हैं ....... जबकि वास्तविक स्थिति इसके बिलकुल विपरीत होती है ...अधिकांश महिलाएं…

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Posted on January 14, 2014 at 5:30pm — 22 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 2:35am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
तहरीके-ग़ज़ल मोहतरमा पूनम माटिया साहिबा, तहे-दिल से मुहब्बतों का शुक्रगुज़ार हूँ। हालांकि ग़ज़ल तो शुक्रवार को ही तख़्लीक़ हो गई थी मगर पेशावर दुश्वारियों के चलते पोस्ट न कर पाया था।
At 8:30pm on August 20, 2012, SANDEEP KUMAR PATEL said…

आदरणीया पूनम माटिया मेम , ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ये सब आपके और आदरणीय नरेश माटिया सर के निरंतर उत्साहवर्धन, स्नेह  और आशीर्वाद का ही परिणाम है
इसे सदैव मुझ पर यूँ ही बनाए रखिये आपका सदैव आभारी हूँ

At 7:59pm on June 25, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

oh god

                  i just saw that your hobby is also painting very good iam very happy to know all.

keep it up

bravo

At 9:22pm on June 23, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

poonam ji main aapki kavita khoj raha tha par nahin mili?plz tell me how i can read/access them.thanks and regards.

At 6:35pm on January 19, 2012, Admin said…

 
 
 

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