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DR. HIRDESH CHAUDHARY
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Samar kabeer commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post बृज क्षेत्र का सावन और उसका सौंदर्य
"मुहतरमा डॉ हृदेश चौधरी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । कृपया रचना के साथ उसकी विधा भी लिख दिया करें ।"
Jul 25
DR. HIRDESH CHAUDHARY posted a blog post

बृज क्षेत्र का सावन और उसका सौंदर्य

मदमस्त चलती हवाएं और कार में एफएम पर मल्हार सुनकर, पास बैठी मेरी सखी साथ में गाना गाने लगती है "सावन के झूलों ने मुझको बुलाया, मैं परदेशी घर वापस आया" गाते गाते उसका स्वर धीमा होता गया और फिर अचानक वो खामोश हो गयी, उसको खामोश देखकर मुझसे पूंछे बिना नही रहा गया। फिर वो पुरानी यादों में खोई हुई सी मुझसे कहती है कि कहाँ गुम हो गए सावन में पड़ने वाले झूले, एक समय था जब सावन माह के आरम्भ होते ही घर के आंगन में लगे पेड़ पर झूले पड़ जाते थे और किशोरिया गाने लगती थी.. कच्ची नीम की निबौरी, सावन जल्दी आइयों…See More
Jul 22
JAWAHAR LAL SINGH commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post मन नहीं करता
"बहुत सुन्दर समसामयिक रचना, बधाई स्वीकारे आदरणीया डॉ. हृदेश चौधरी जी! "
Jul 10
vijay nikore commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post मन नहीं करता
"सुन्दर रचना के लिए बधाई, आदरणीया हृदेश जी।"
Jul 10
Samar kabeer commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post मन नहीं करता
"मुहतरमा  डॉ हृदेश चौधरी जी आदाब,बढ़िया रचना हुुुई है,बधाई लेें ।"
Jul 3
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post मन नहीं करता
"भावपुर्ण अभिव्य्क्ति के लिए बधाई"
Jul 3
TEJ VEER SINGH commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post मन नहीं करता
"हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ हृदेश चौधरी जी।लाज़वाब रचना।"
Jul 3
DR. HIRDESH CHAUDHARY posted a blog post

मन नहीं करता

हर पन्ने पे होंगीं बलात्कार की खबरें,इसलिए अखबार पढ़ने का मन नही करता।परिवार की जड़ें उखड़ कर वृद्धाश्रम में आ गईं,अब बच्चों को संस्कारी कहने का मन नही करता।नंगी सड़क पे बचाओ बचाओ पूरे दिन चिल्लाता रहा,फिर भी उसपे विश्वास करने का मन नही करता।शरीर के इंच इंच पे, मैं राष्ट्रभक्त हूँ गुदवा रखा था,फिर भी उसकी राष्ट्रभक्ति पढ़ने का मन नही करता।कोई मोब्लिंचिंग तो कोई चमकी में मरा होगा इसलिए,अब सुबह जल्दी उठकर सूरज देखने का मन नही करता।सीमाओं से आते हैं हर रोज शहीदों के ताबूत,परिजनों का ये दर्द अब और सहने…See More
Jul 3

Profile Information

Gender
Female
City State
AGRA UP
Native Place
AGRA
Profession
GENERAL SECRETARY , AARADHANA (www.aaradhanagroup.com)
About me
EDUCATIONIST, SOCIAL SERVICE & WRITER

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बृज क्षेत्र का सावन और उसका सौंदर्य

मदमस्त चलती हवाएं और कार में एफएम पर मल्हार सुनकर, पास बैठी मेरी सखी साथ में गाना गाने लगती है "सावन के झूलों ने मुझको बुलाया, मैं परदेशी घर वापस आया" गाते गाते उसका स्वर धीमा होता गया और फिर अचानक वो खामोश हो गयी, उसको खामोश देखकर मुझसे पूंछे बिना नही रहा गया। फिर वो पुरानी यादों में खोई हुई सी मुझसे कहती है कि कहाँ गुम हो गए सावन में पड़ने वाले झूले, एक समय था जब सावन माह के आरम्भ होते ही घर के आंगन में लगे पेड़ पर झूले पड़ जाते थे और किशोरिया गाने लगती थी..

कच्ची नीम की निबौरी, सावन…

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Posted on July 22, 2019 at 10:00pm — 1 Comment

मन नहीं करता

हर पन्ने पे होंगीं बलात्कार की खबरें,

इसलिए अखबार पढ़ने का मन नही करता।

परिवार की जड़ें उखड़ कर वृद्धाश्रम में आ गईं,

अब बच्चों को संस्कारी कहने का मन नही करता।

नंगी सड़क पे बचाओ बचाओ पूरे दिन चिल्लाता रहा,

फिर भी उसपे विश्वास करने का मन नही करता।

शरीर के इंच इंच पे, मैं राष्ट्रभक्त हूँ गुदवा रखा था,

फिर भी उसकी राष्ट्रभक्ति पढ़ने का मन नही करता।

कोई मोब्लिंचिंग तो कोई चमकी में मरा होगा इसलिए,

अब सुबह जल्दी…

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Posted on July 3, 2019 at 8:14am — 4 Comments

गणतंत्र की आस में तरसता घुमंतू समाज

सड़क किनारे पसरी घोर निराशा और उस निराशा में डूबी हुयी जिंदगियां, चिथड़ों में लिपटे हुए बच्चे, टूटी फूटी झोपड़ियों में सुलगते चूल्हे और उसी सड़क पर सरकार के नुमाइंदों की सरपट दौड़ती चमकती कारों में चर्चा गरम हो रही होती है डिजिटल इंडिया की, पर उन नेताओं को सड़क की जिंदगी बसर करती इस  कौम की  बदहाल  तस्वीर नज़र नहीं आती. जो कि इनके छदम दावों को धूल धूसरित करती है माना कि जीवन अनवरत संघर्ष का नाम है, जिसका कर्म है सदैव चलते रहना, आगे बढ़ते रहना. किन्तु…

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Posted on January 25, 2016 at 12:30pm — 6 Comments

ये कैसा कन्या पूजन

एक हाथ से कन्या पूजन दूजे हाथ से कन्या हनन

माँ को खुश करने का कैसा है ये आयोजन

धन वैभव की चाहत में सुख संपत्ति के आगत में

मनाते सभी त्यौहार लक्ष्मी जी के स्वागत में

पर ये कैसा अनर्थ जो गृहलक्ष्मी पर भारी

घर अस्पताल में चलती इस लक्ष्मी पर आरी

माँ की ममता बेबस और निष्ठुर पिता का साया

उस घर में बेटी का जन्म क्यूँ न किसी को भाया

कैसी स्वार्थी कैसी निर्दयी ये दुनिया की मंडी

जहाँ बेबस है शक्ति स्वरूपा दुर्गा काली और चंडी

जिन हाथों से डाली जाती है…

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Posted on October 15, 2015 at 10:00pm — 1 Comment

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At 8:24am on January 17, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीया , क्षमा चाहता हूँ  , नाम से भ्रमित हो गया था , भविष्य मेव ध्यान रखूंगा ॥

 
 
 

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