For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Tasdiq Ahmed Khan's Blog – March 2018 Archive (3)

ग़ज़ल (मेरी आँखों में तस्वीरे दिलदार है )

(फ़ाइलुन---फ़ाइलुन---फ़ाइलुन---फ़ाइलुन)



हो रहा उनका हर वक़्त दीदार है |

मेरी आँखों में तस्वीरे दिलदार है |



कुछ तो है दोस्तों शक्ले महबूब में

देखने वाला कर बैठता प्यार है |



उनका दीदार मुमकिन हो कैसे भला

उनके चहरे पे बुर्क़े की दीवार है |



मुझ पे तुहमत दग़ा की लगा कर कोई

कर रहा ख़ुद को साबित वफ़ादार है |



चाहे दीदारे दिलबर ,दवाएं नहीं

वो हकीमों मुहब्बत का बीमार है |



उसको क्या वारदाते जहाँ की ख़बर

जो पढ़े ही नहीं…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 14, 2018 at 11:30am — 32 Comments

ग़ज़ल (वो लगता है आफ़ात करने चले हैं )

(फ़ऊलन--फ़ऊलन--फ़ऊलन--फ़ऊलन)



शुरूए इनायात करने चले हैं |

वो लगता है आफ़ात करने चले हैं |



ख़ुदा ख़ैर पाबंदियाँ हैं नज़र पर

मगर वो मुलाक़ात करने चले हैं |



यक़ीं ही नहीं उम्र ढलने का उनको

जो तब्दील मिर आत करने चले हैं |



खिलाना है फ़िरक़ा परस्तों को मुंह की

वो लोगों फ़सादात करने चले हैं |



मुहब्बत के अंजाम से हैं वो ग़ाफ़िल

जो इसकी शुरुआत करने चले हैं |



भला किस तरह कर दें उसको नुमायाँ

सनम से जो हम बात करने चले हैं…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 8, 2018 at 5:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल ( आप से मैं प्यार करना चाहता हूँ )

(फ़ाइलातुन ---फ़ाइलातुन ---फ़ाइलातुन )



बह्रे आतिश पार करना चाहता हूँ |

आप से मैं प्यार करना चाहता हूँ |



जिस खता की आपने मुझको सज़ा दी

वो खता सौ बार करना चाहता हूँ |



शहरे दिलबर छोड़ कर जाने से पहले

मैं विसाले यार करना चाहता हूँ |



बंदिशें मेरी निगाहों पर हैं लेकिन

उन का मैं दीदार करना चाहता हूँ |



फेर कर बैठे हुए हैं आप चहरा

मैं निगाहें चार करना चाहता हूँ |



मैं ख़ुदा हाफ़िज़ तुम्हें कहने से पहले

इश्क़ का…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 3, 2018 at 6:30pm — 9 Comments

Monthly Archives

2022

2019

2018

2017

2016

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
21 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service