For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Harish Bhatt's Blog – March 2012 Archive (11)

आसमां परिंदो का

मन कहता है

आसमां में चलो

दिमाग कहता है

चले आसमां में

तो गिर जाओगे

दिल और दिमाग ने

किया मिलकर मंथन और

कर दिया फैसला

जिंदगी की मेरी

संभल कर चलो

जमीन पर

पहुंच जाओगे मंजिल पर

न पालों ख्‍वाहिश

आसमां में उडने की

क्‍योंकि

जमीं तुम्‍हारी

आसमां परिंदो का

अपनी हद में रहो

उडने दो उन्‍हें भी

खुले आकाश में

फिर देखा है न

आसमां में उडने वाले को

उन्‍हें भी आना होता है

अपनी जमीं… Continue

Added by Harish Bhatt on March 28, 2012 at 12:48pm — 6 Comments

ये कहाँ आ गए हम

ये कहाँ आ गए हम

यूँ साथ चलते-चलते….

कभी मरते थे

एक-दूजे पर

आज मार रहे

एक-दूजे को

कभी कहते थे

हिन्दू- मुस्लिम- सिख- ईसाई

आपस में है भाई-भाई

कैसे बदलती है सोच

यह भी देख रहे

गैरों से लड़ते-लड़ते

अपनों से लड़ बैठे

शान्ति की तलाश में

अमन को खो…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 25, 2012 at 12:02pm — 2 Comments

हम पागल ही अच्छे

तेरी खामोशी

ये कहां ले आई मुझे

तेरी एक

हां के इंतजार में

बदल गए

रास्ते जिंदगी के

जाना था कहां

पहुंच गए यहां

तेरी राह

देखते-देखते

इरादे पस्त हो गए

अब तो यह आलम है

दिल रोता है

शब्द निकलते है

दुनिया हंसती है

और

कहती है…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 23, 2012 at 11:50am — 5 Comments

मतलबी हूं मैं

दुनिया बहुत मतलबी है

एक दोस्त की तलाश में

कदम-कदम पर खाया है धोखा

गिर-गिर कर संभला हूं

कैसे करूं यकीन अब तुझ पर

अब तो खुद से ही लगता है डर

कही मैं भी तो मतलबी नहीं

सोचता हूं जब एकांत में

समझ आता है कुछ-कुछ

मैं भी हूं मतलबी

क्योंकि मतलबी दुनिया में

मैं कोई खुदा तो नहीं

आखिर…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 22, 2012 at 2:04pm — 5 Comments

चाहत

मेरी चाहत जवां होती है

तेरी हां के इंतजार में

तेरा आना, तेरा जाना

कर देता है बेकरार

मेरी चाहत जवां होती है

तेरी हां के इंतजार में

दिन पर दिन

रात दर रात

गुजरती जा रही

आंखों से नींद

दिल से चैन

गायब हो जाते रहे

अब तो हाल यह है कि

मेरी चाहत भी

मुर्दा होती…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 20, 2012 at 11:31am — 3 Comments

छलक जाते है आंसू

छलक जाते है आंसू

मेरी आंखों से

जब देखता हूं तुमको

बंद आंखों से

दिल होता है बैचेन

जब सोचता हूं

तुम्हारे बारे में

काश!

न देखा होता तुमको

न जाना होता तुमको

न आते दिल के करीब

न होता प्यार तुमसे

न होते जुदा हम

तब होती

एक ही बात

तुम भी रहती…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 15, 2012 at 1:56am — 3 Comments

तेरी याद

सोचा था

तेरी याद के सहारे

जिंदगी बीता लूंगा

अब न तेरी याद आती है

न ही जिंदगी के दिन ही बचे

जो बचे भी उनमें क्या तेरे मेरे

क्या सुबह, क्या शाम

बस एक ही तमन्ना है

जहां भी रहो मुझे याद करना

क्योंकि तुम याद करोगे तो

दुनिया से जाते वक्त गम न होगा

क्योंकि तुम, तुम हो और हम, हम

राहें जुदा हो गई तो क्या

कभी मिलकर चले थे मंजिल की ओर

अब तो सोच कर भी सोचता हूं

क्यों मिले थे हम और क्यों बिछड़े

सोचता हूं

तेरी याद को ही…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 12, 2012 at 2:49am — 6 Comments

हम बेघर भले

कौन कहता है जन्नत इसे,

हम से पूछो जो घर में फंसे।

न हिफाजत, न इज्जत मिली,

कर- कर कुर्बानी हम मर गए।

दुश्मनों की जरूरत किसे,

जुल्म अपनों ने ही हम पे किए।

हमने हर शै संवारी मगर,

खुद हम बदरंग होते गए।

अपने हाथों बनाया जिन्हें,

हाथ उनके ही हम पर उठे।

घर के अंदर भी गर मिटना है,

तो संभालों ये घर, हम…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 10, 2012 at 1:44pm — 5 Comments

बहू या अलादीन का चिराग

एक बात समझ में नहीं आती है कि जब हमारी हैसियत नहीं होती तो क्यों दूसरे परिवार की प्यारी सी बिटिया को अपने घर में बहू बनाकर लाते है. क्या हम इतने निकम्मे, लूले-लंगडे हो गए है कि बेटे व परिवार की सुख-सुविधा की वस्तुओं को एकत्र करने की नियत के साथ दूसरे से धन ऐंठने के लिए उनकी प्यारी सी बिटिया को विवाह मंडप में अग्नि के सात फेरों के बाद अपने घर ले आते है. फिर उस परिवार की मजबूरी बन जाता है कि वह अपनी बिटिया की खुशी के लिए वह सब कुछ करे, जो हम चाहते है. क्योंकि हम तो पहले से ही इतने कंगाल हैं,…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 8, 2012 at 12:04pm — 3 Comments

होली एक चुनौती

आपको और आपके परिवार को रंगों के त्यौहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं

हम खुशनसीब है कि जिंदगी ने हमको अपने गिले-शिकवे दूर करने का एक और मौका दिया है। माना जाता है कि रंगो की होली में गिले-शिकवे बह जाते है। भले ही दिखावे के लिए ही सही, लोग एक-दूसरे के गले मिलकर होली की बधाई के साथ-साथ अपने को पाक-साफ बताते है, तो इसमें क्या बुरा है। आखिर होली का मकसद ही है बैर-भाव भुला कर प्यार से एक-दूसरे के गले लग जाना। वैसे भी दिखावे का जमाना है, तो दिखाने के लिए ही सही, कुछ बुराई तो कम होगी ही हमारे…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 6, 2012 at 9:43am — 1 Comment

जरूरत सोच बदलने की

हर सोच, हर कल्पना, हर विचार पर हजारों पन्ने लिखे जा चुके है. कुछ लोगों की दुष्ट मानसिकता की बदौलत आज तक भी हम गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह नहीं उबर पाए है. समय के साथसाथ गुलामी की परिभाषा भी बदल गई. पहले विदेशियों का कब्जा होने से हम गुलाम थे. उनको खदेड़ा, तो अब यहां धार्मिक, राजनैतिक ताकतों के गुलाम हो गए. जो इनकी सीमाओं से बाहर रहने का साहस दिखाए, वह समाज के अयोग्य नागरिकों में शामिल कर दिया जाता है. बहरहाल बात यह है कि कुछ लोग अपने जीवनकाल में वह मुकाम हासिल करते है, जिनके आचरण को आदर्श…

Continue

Added by Harish Bhatt on March 5, 2012 at 1:32pm — 3 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service