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Deepak Sharma Kuluvi's Blog – March 2012 Archive (5)

लुत्फ़-ए-बुढ़ापा

लुत्फ़-ए-बुढ़ापा 




एक कतरा दर्द-ए-दिल का उनके ही काम आया

जब मिला न कोई हमदर्द तो यही काम आया  
हम तो 'दीपक' की मानिंद जले जलते गए
मेरा रोना भी उन्हें शायद न…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 28, 2012 at 3:06pm — 7 Comments

बेहिसाब मिला

गम मिला मुझको बेहिसाब मिला 

बस मुहब्बत का यह ईनाम मिला 
गम मिला मुझको--------------
.

हमको आता है मज़ा जलने में हकीकत है…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 27, 2012 at 11:30am — 7 Comments

बुझना ही होता है

बुझना ही होता है

वोह जाना चाहते थे दूर

किनारा कर किया हमनें
न हो तकलीफ उनको
यह ईरादा कर लिया हमनें 
वोह जाना चाह----------
बड़ा मुश्किल था जीना क्या…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 26, 2012 at 10:40am — 6 Comments

वेदर्द



वेदर्द 


मेरी ज़िन्दगी मुझसे रूठी रही

हम मनाते रहे वोह रुलाती रही 
दूर जाने की कोशिश बहुत की मगर
याद उनकी  तो अक्सर ही  आती रही 
भूलना भी न था  हम भी करते तो क्या
बेवफाई से बेहतर था अपना…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 22, 2012 at 5:46pm — 7 Comments

शिक़ायत

शिक़ायत

मेरे दिल के कुछ कांटे
मेरे साथ रहे और चुभते रहे
वोह मुझको छलनी करते रहे
हम उनकी हिफाज़त करते रहे
अपना गुनाह बस इतना था
हम उनको अपना कह बैठे
वह हमसे नफरत करते रहे
हम उनसे मुहब्बत करते रहे
हम दीपक थे जलना ही था
पर वफ़ा की आग में जलते रहे
वह समझ न पाए प्यार मेरा
दुनियाँ से शिक़ायत करते रहे

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
9350078399
१६.०३.१२.

Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 16, 2012 at 11:46am — 9 Comments

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