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Satish mapatpuri's Blog – May 2010 Archive (6)

थमते कदम आ जाइये

चाँद नभ में आ गया, अब आप भी आ जाइये.

सज गई तारों की महफ़िल, आप भी सज जाइये.

नींद सहलाती है सबको, पर मुझे छूती नहीं.

जानें आँखें पथ से क्यों,क्षणभर को भी हटती नहीं.

प्यासी नज़रों को हसीं, चेहरा दिखा तो जाइये.

कल्पना मेरी बिलखती, वेदना सुन जाइये.

सज गई तारों की महफ़िल, आप भी सज जाइये.

कब तलक मैं यूँ अकेला, इस तरह जी पाउँगा.

इस निशा- नागिन के विष को, किस तरह पी पाउँगा.

इस जहर में अधर का, मधु रस मिला तो जाइये

याद जो हरदम रहे, वो बात तो कर जाइये

सज… Continue

Added by satish mapatpuri on May 31, 2010 at 2:17pm — 8 Comments

आँखें नम थी मगर मुस्कुराते रहे (ग़ज़ल )

दौरे गम में भी सबको हंसाते रहे .
आँखें नम थी मगर मुस्कुराते रहे .
किसमें हिम्मत जो हमपे सितम ढा सके .
वो तो अपने ही थे जो सताते रहे
जिन लबों को मुकम्मल हँसी हमने दी .
वो ही किस्तों में हमको रुलाते रहे .

उनको हमने सिखाया कदम रोपना .
जो हमें हर कदम पे गिराते रहे .

काश !मापतपुरी उनसे मिलते नहीं .
जो मिलाके नज़र फिर चुराते रहे .

गीतकार- सतीश मापतपुरी
मोबाइल -9334414611

Added by satish mapatpuri on May 24, 2010 at 4:00pm — 5 Comments

चाहत (ग़ज़ल )

गिला उनको हमसे हमीं से है राहत .
खुदा जाने कैसी है उनकी ये चाहत .
उनके लिए मैं खिलौना हूँ ऐसा .
जिसे टूटने की नहीं है इज़ाज़त .
इन्सां से नफ़रत हिफाज़त खुदा की .
ये कैसा है मज़हब ये कैसी इबादत .
बदन पे लबादे ख्यालात नंगे .
यही आजकल है बड़ों की शराफत .
सज-धज के मापतपुरी वो हैं निकले .
कहीं हो ना जाए जहाँ से अदावत .
गीतकार - सतीश मापतपुरी
मोबाइल -9334414611

Added by satish mapatpuri on May 20, 2010 at 1:00pm — 8 Comments

एक प्रेमिका की अभिव्यक्ति

अब क्यूँ अपना रूप सजाऊं ,किसके लिए सिंगार करूँ .

दिल का गुलशन उजड़ गया तो ,फिर से क्यूँ गुलज़ार .

जब से गए -तन्हाई में मैं ,तुमको ही सोचा करती हूँ .

देख न ले कोई अश्क हमारा ,छिप -छिप रोया करती हूँ .

प्यार भी अपना -गम भी अपना ,क्यों इसका इज़हार करूँ .

दिल का -------------------------------------------

शीशा जैसे टूट गए जो, माना की वो सपने थे .

सच है आज पराये हो गए, पर कल तक तो अपने थे .

आज भी याद है कल की बातें, क्यों इससे इनकार करूँ .

दिल का… Continue

Added by satish mapatpuri on May 17, 2010 at 11:29am — 4 Comments

ग़ज़ल

तुम्हारे नाम की ऐसी हंसी एक शाम कर देंगें .

रहोगे बेखबर कैसे तुम्हें बदनाम कर देंगें .

मोहब्बत में दिलों को हारने वाले बहुत होंगे .

मगर दिल चीज़ क्या हम ज़िन्दगी तेरे नाम कर देंगें .

तेरा दावा है तेरा संग दिल हरगिज़ ना पिघलेगा .

हमारी जिद्द है की एक दिन तुम्हें गुलफाम कर देंगे .

सुना है प्यार से मेरा नाम लेतो हो अकेले में .

यकीं होता नहीं की आप भी ये काम कर देंगें .

वफ़ा मापतपुरी मिलती है अब ग़ज़लों में शेरों में .

मगर हम बेवफा कैसे तुम्हें ऐलान कर… Continue

Added by satish mapatpuri on May 14, 2010 at 4:20pm — 6 Comments

जिंदगी थक गयी ऐसे हालात से .

ग़ज़ल
यूँ ना खेला करो दिल के ज़ज्बात से .
जिंदगी थक गयी ऐसे हालात से .
रोज़ मिलते रहे सिर्फ मिलते रहे .
अब तो जी भर गया इस मुलाक़ात से .
ख्वाब में आता हँसता लिपटता सनम .
हो गई आशनाई हमें रात से .
गा रहा था ये दिल हंस रही थी नज़र .
क्या पता आँख भर आई किस बात से .
फन को मापतपुरी पूछता कौन है .
पूछे जाते यहाँ लोग अवकात से .
गीतकार -सतीश मापतपुरी
मोबाइल -9334414611

Added by satish mapatpuri on May 5, 2010 at 2:04pm — 6 Comments

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