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Tasdiq Ahmed Khan's Blog – October 2016 Archive (4)

अस्ल दीपावली ( लघुकथा

सुरेश को घर में आता देख बच्चे फ़ौरन उनके पास आगये और थैले को देखने लगे ,वो बाज़ार से जो सामान लेकर आए थे

उनमें उनके पटाखे भी थे |



बच्चे पटाखे देख कर बोले " यह क्या पापा आप तो सिर्फ़ फुलझड़ी ,अनार और चरखी ही लाए हैं , आवाज़ वाले बम ,और

रॉकेट वग़ैरा नहीं लाए "

सुरेश ने जवाब में कहा " दीपावली रोशनी का त्योहार है ,इसमें सिर्फ़ रोशनी करनी चाहिए "

बच्चे फिर बोले " हर तरफ से पटाखों की आवाज़ें आ रही हैं , कितना अच्छा लग रहा है ,दूसरे बच्चे चिढ़ाएगे कि हमारे…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on October 31, 2016 at 9:30am — 9 Comments

ग़ज़ल ( जादूगरी हो गयी )

फाइलुन -फाइलुन -फाइलुन -फाइलुन

आँखों आँखों में जादूगरी हो गयी | 

उसका मैं हो गया वह मेरी हो गयी |

उनकाअहसास महफ़िल में उसदम हुआ 

यक बयक जब वहाँ रोशनी हो गयी |

फ़ायदा तो उठाएगा इस का जहाँ 

आपसी प्यार में गर कमी हो गयी |

कोई अपनी कमी को नहीं देखता 

क़ौल सबका है दुनिया बुरी हो गयी|

आगये वक़्तेआख़िर इयादत को वह 

पूरी ख्वाहिश मेरी आख़िरी हो गयी |

वक़्त आया है जिस दिन से मेरा…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on October 27, 2016 at 9:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल(शबाब पहने हुए )

फाइलातुन-मफाइलुन-फइलुन

कमसिनी में शबाब पहने हुए |

हुस्न निकला निक़ाब पहने हुए |

तुहमते बेवफ़ाई का कब से

हम हैं बैठे खिताब पहने हुए |

कौन आया है चीखी तारीकी

बज़्म में माहताब पहने हुए |

आँख में इंतज़ार दिल में तड़प

मैं हूँ यह इंक़लाब पहने हुए|

मत यक़ीं करना उसपे आया है

जो वफ़ा का हिजाब पहने हुए |

सामना अस्ल का ज़रूरी है

क्यूँ हैं आँखों में ख्वाब पहने हुए…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on October 20, 2016 at 8:30pm — 17 Comments

ग़ज़ल ( शुरुआते मुहब्बत हो गयी )

ग़ज़ल ( शुरुआते मुहब्बत हो गयी )

------------------------------------------

(फ़ाइलातुन -फ़ाइलातुन -फ़ाइलातुन- फाइलुन )

यक बयक मुझ पर सितमगर की इनायत हो गयी ।

ऐसा लगता है शुरुआते  मुहब्बत   हो  गयी ।

की वफ़ा गैरों से अहदे इश्क़ अपनों से किया

जानेमन यह तो अमानत में खयानत हो गयी ।

यह नतीजा तो अज़ीज़ों पर  यक़ी करने का है

यूँ नहीं पैदा सनम के दिल में नफरत हो गयी ।

दिल की अब कीमत कहाँ है हुस्न के बाजार…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on October 3, 2016 at 8:58pm — 16 Comments

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