For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ छोटेलाल सिंह's Blog – October 2018 Archive (4)

लौहपुरुष

लौहपुरुष

( आल्हा-वीर छन्द )

लौहपुरुष की अनुपम गाथा,दिल से सुने सभी जन आज

दृढ़ चट्टानी हसरत वाले,बचा लिये भारत की लाज

धन्य हुई गुजराती गरिमा,जहाँ जन्म पाए सरदार

अखंड भारत बना गए जो,सदा करूँ उनकी जयकार

पिता झवेर लाडबा माता,की पटेल चौथी सन्तान

सन अट्ठारह सौ पचहत्तर,पैदा हुए हिन्द की शान

इकतीस अक्टूबर हिन्द में,हम सबका पावन दिन खास

भारतरत्न हिन्द की हस्ती,कण कण को आ किये उजास

खेड़ा जनपद गाँव करमसद,लेवा कृषक एक…

Continue

Added by डॉ छोटेलाल सिंह on October 31, 2018 at 1:05pm — 8 Comments

युग द्रष्टा कलाम

युग द्रष्टा कलाम

युग द्रष्टा कलाम की वाणी

हर पल राह दिखाएगी

युगों युगों तक नव पीढ़ी को

मंजिल तक ले जाएगी ll

बना मिसाइल अपनी मेधा

दुनिया को दिखलाए हैं

अणुबम की ताकत दिखलाकर

जग में मान बढ़ाए हैं ll

सपने सच होते हैं जब खुद

सपने देखे जाते हैं

दुख में जो भी धैर्य उठाये

कलाम सा बन जाते हैं ll

क्लास रूम का बेंच आखिरी

शक्ति स्रोत बन जाता है

गुदड़ी में जो लाल छिपा है

काम देश के आता है…

Continue

Added by डॉ छोटेलाल सिंह on October 16, 2018 at 2:40pm — 7 Comments

बेटी बचाएंगे

आन बान है घर की बेटी

इसको सदा बचाएंगे

बेटी से घर रोशन होता

मिलकर सभी पढ़ाएंगे ll

मन में लें सौगंध सभी जन

नहीं कोंख में मारेंगे

बेटी को खुद पढ़ा लिखाकर

अपना चमन सुधारेंगे ll

भेदभाव बेटी बेटा में

कभी नहीं होने देंगे

बेटी घर की रौनक होती

इसे नहीं रोने देंगे ll

सभी क्षेत्र में बेटी आगे

अपने बल से जाती है

आसमान को छूती बेटी

घर का मान बढ़ाती है ll

दो दो घर बेटी सँवारती

सारी खुशियाँ देती…

Continue

Added by डॉ छोटेलाल सिंह on October 11, 2018 at 5:48pm — 12 Comments

मानवता के अग्रदूत

मानवता के अग्रदूत

मानवता के अग्रदूत बन

नववाहक सच्चे सपूत बन

किया स्वप्न तूने साकार

नत मस्तक पशुता बर्बरता

देख अहिंसा का हथियार

तुझसे धन्य हुआ संसार ll

मानवता का ध्वज लहराए

जन जन को सन्मार्ग दिखाए

तेरे दया धर्म के आगे

जग लगता कितना आसार

तुझसे धन्य हुआ संसार ll

नित सुकर्म भरपूर किया है

हर विषाद को दूर किया है

श्रम प्रसूति के बल से बापू

किया चतुर्दिक बेड़ा पार

तुझसे धन्य हुआ संसार…

Continue

Added by डॉ छोटेलाल सिंह on October 2, 2018 at 6:25pm — 12 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
6 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
8 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
15 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service