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बेहाल जिन्दगी

बिखरे सूखे पत्तों के बीच
फूस की झोपड़ी में
बेहाल जिन्दगी
अटकी साँसे
दुहाई दे रही थीं
सिर्फ जीने के लिए
दूर स्थित खेत में
कुछ काले श्वान
दूषित मटमैले
चेहरों पर भौंक रहे थे
बार बार गूँजती आवाज
सहमा डरा चेहरा
बहुत निराश
कम्पित भयावहता के बीच
कुछ टूटे फूटे बर्तन
बिखरे पड़े इधर उधर
बहते अश्रुओं के बीच
कोस रहे थे
अपनी बदनसीबी पर
निरीह आँखे निहार रही थी
ऊँचे मुंडेर पर
अट्टालिकाओं की नींव में
स्वेद बहाने वाला अभावग्रस्त
एक अदना सा आदमी
जिंदगी और मौत के बीच
एक-एक दाने को मुहाल
सूखती अतड़ियाँ
किसी के सेवार्थ
दफ़न होती जिंदगी
सुदूर आसमान में
भौतिक कोलाहल के बीच
वही बिखरे पत्ते
फटी कथरी
टूटे फूटे बर्तन
रह रह कर भौंकते श्वान
छटपटाती आत्मा की आँखे
सिर्फ न्याय के लिए

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 3, 2017 at 9:19pm
आदरणीय सलीम रजा साहब आपके उत्साह वर्धन से मन आह्लादित हुआ ,दिल से आभार
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 3, 2017 at 9:18pm
आदरणीय नरेंद्र जी आपने उत्साह वर्धन किया आपको दिल से शुक्रिया
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 3, 2017 at 9:16pm
आदरणीय बृजेश जी आपकी पैनी नजर से लेखन सार्थक हुआ,आपको बहुत बहुत धन्यवाद ,स्नेह बनाएं रखें
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 3, 2017 at 9:02pm
आदरणीय समर साहब जी आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ,आप अपना स्नेह बनाये रखें, आपको दिल से आभार
Comment by narendrasinh chauhan on November 2, 2017 at 5:49pm

बहुत सुंदर रचना

Comment by Samar kabeer on November 1, 2017 at 8:36pm
जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, क्या मंज़र कशी की है आपने अपने शब्दों में,एक चित्र सामने आ गया,बहतरीन कविता,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
कुछ टंकण त्रुटियाँ देख लें ।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 1, 2017 at 8:35pm

जनाब  छोटेलाल सिंह जी ,
खूबसूरत कविता के लिए बधाई।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 1, 2017 at 7:55pm
अच्छी कविता हुई आदरणीय डा.साहब..मुझे लगता है आपने इस कविता में कई बातें कहने की कोशिश की है लेंकिन पूरी तरह से कह नहीं पाये..कम्पित भयावहता' ये बात कुछ समझ नहीं आई??इसी तरह निरीह आँखें निहार रही थीं ऊँचे मुंडेर पर!!क्या??निहार रही थीं??मुझे लगता है यहाँ पर की जगह को होता तो ज्यादा बेहतर लगता।माफ़ कीजिये जो मुझे लगा वो लिख दिया।क्योंकि विषय और भाव बहुत ही अच्छे परिलक्षित हो रहे हैं।सादर
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 1, 2017 at 6:39pm
आदरणीय विजय निकोर साहब उत्साह वर्धन के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 1, 2017 at 6:38pm
आदरणीय तेजवीर सिंह जी आपने हमें उत्साहित किया आपको दिल से आभार

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