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दीवाली (सरसी छन्द)


दिल से दिल के तार मिलाएं, दीवाली के नाम
खाएं और खिलाएं सबको,दें अच्छा पैगाम

एक दीप सा बन जीवन में, करें सदा उल्लास
मन मंदिर में ज्ञानदीप से,नित ही करें प्रकाश

झूम झूमकर खुशी मनाएं,बैठें सबके संग
कर्म सुगम पथ सब अपनाएं,सीख हुनर औ ढंग

बोलें मीठी वाणी सबसे,करें नहीं विद्वेष
दुनिया में है सबसे न्यारा,प्यारा भारत देश

एक बनेंगे नेक बनेंगे,ऊँचा होगा नाम
सुन्दर समाज अपना होगा,नेक करेंगे काम

तन मन में हो भाईचारा, भेदभाव हो दूर
आपस में मिल दीप जलाएं, मदद करें भरपूर

दीवाली में दर्द मिटाएं,जाएं सबके द्वार
करें उजाला सभी घरों में, चमक उठे संसार

मन के भाव सदा हो निर्मल,छोड़ें सभी विकार
अंतर्मन में करें उजाला,बढ़े नहीं व्यभिचार

मिथ्या तम को दूर भगाएं, बाटें सत्य प्रकाश
सबल निबल सब आगे आएं, करें अधर्म विनाश

जगमग हो सबकी दीवाली,सुरभित हो सद्भाव, दीवाली के हर दीपक से,बरसे प्रेम लगाव

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 30, 2017 at 9:36pm
आदरणीया कल्पना भट्ट जी बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 30, 2017 at 9:07pm

बहुत ही सुंदर रचना हुई है आदरणीय, हार्दिक बधाई आपको|

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 29, 2017 at 11:44am
बहुत ही सुंदर रचना हुई आदरणीय..सादर
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 26, 2017 at 9:57pm
आदरणीय सलीम रजा साहब ,आदरणीय आरिफ साहब और भाई सुरेन्द्र जी आप सभी को दिल से शुक्रिया
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 26, 2017 at 9:53pm
परम आदरणीय समर साहब जी आपने हमें मान दिया और मार्गदर्शन भी किया इसके लिए आपको शत शत नमन
Comment by Samar kabeer on October 26, 2017 at 5:29pm
जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,दीपावली के मौक़े पर बहुत उम्दा सरसी छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
पहले छन्द के दूसरे पद में 'उल्लास'और 'प्रकाश'की तुकान्तता सही नहीं है,देखियेगा ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 26, 2017 at 3:15pm
आo ख़ूबसूरत रचना के लिए मुबारक़बाद
Comment by Mohammed Arif on October 26, 2017 at 7:33am
आदरणीय छोटे लाल जी आदाब, दीपावली पर्व को आधार बना बेहतरीन सरसी छंद की रचना । अच्छा संदेश देने का प्रयास किया गया । जनमानस में अवश्य ही सीख लेगा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 26, 2017 at 5:12am
आद0 भैया डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। बहुत बढ़िया सरसी छःन्द का अभ्यास हुआ है। कोटिश बधाइयाँ इस सृजन पर।

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