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Rash Bihari Ravi's Blog – November 2010 Archive (5)

प्रधान मंत्री जी आपको सादर नमस्कार ,

प्रधान मंत्री जी आपको सादर नमस्कार,

क्यों कोई बोले आप काम करते हो बेकार,

डी राजा को आपने इतना दिन बचाया,

कलमाड़ी को आप पैसा खूब कमवाया,

आपकी कृपा से पृथ्वी राज के सपना साकार,

प्रधान मंत्री जी आपको सादर नमस्कार,

एन डी ए से ममता सरपट भागी थी,

आग बबूला हो गई थी बस एक ही घपला पे,

आज आपकी पल्लू पकड़ कर बैठी हैं,

सोचिए कितना अच्छा हैं आपका ब्यवहार,

प्रधान मंत्री जी आपको सादर नमस्कार,

अब तक जितने हुए घपले पूरे हिदुस्तान में,

सब से ज्यादा कहे… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on November 22, 2010 at 11:00am — 3 Comments

माँ की भेट चढाने दो ,

मुझे सपनो में जीने दो ,

हकीकत में कुछ कर नहीं पाता ,

झूठ मूठ झुंझलाता हूँ ,

लड़ मरने की चाहत मन में हैं ,

डर के मगर भाग जाता हूँ ,

जो कर नहीं पाता जाग जाग ,

वो सोकर मैं कर जाता हूँ ,

मुझे सपनो में जीने दो ,

आज सपने में डी राजा को ,

बहुत बहुत समझाया ,

बोला अरे ओ अनाड़ी,

ये क्या कर डाला ,

अरबो की गई हिंद के प्यारे ,

तूने कितना बनाया ,

झट से बोला वो मुझसे ,

गुरु जीवन सफल बनाया ,

जो हैं बाते वो ,

अब खुल कर हो जाने… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on November 20, 2010 at 1:30pm — 4 Comments

रिश्ते बनते हैं बदलते हैं ,

रिश्ते बनते हैं बदलते हैं ,
मगर जीवन चलता रहता हैं ,
कभी बेटा पैदा होने की ख़ुशी ,
तो कभी बाप का मरने का गम ,
कभी ख़ुशी के छलकते आँसू ,
तो कभी गम से होती आँखे नम ,
समय चक्र चलते रहते हैं ,
रिश्ते बनते हैं बदलते हैं ,

रिश्तों की मिठास ,
वो अपने बुआ के आते ही ,
उनकी गोद में चढ़ने के लिए ,
अक्सर मचलता था ,
लेकिन जब से बुआ करने लगी
पुश्तैनी जायदाद में
हिस्से की मांग ,
तब से ख़त्म होने लगी ,
रिश्तों की मिठास ,

Added by Rash Bihari Ravi on November 13, 2010 at 4:30pm — 2 Comments

उस बापू की जरुरत हैं ,

उस बापू की जरुरत हैं ,
आज हिंदुस्तान की चाह हैं ,
हमारी सोच को आंदोलित कर ,
नई राह दिखने के लिए ,
उस बापू की जरुरत हैं ,
उस बाबु की नहीं ,
जो स्वघोषित हो ,
उस बापू का भी नहीं ,
जो चमचो द्वारा बिकसित हो ,
जो मन पे राज करे ,
उस बाबु की जरुरत हैं ,

Added by Rash Bihari Ravi on November 6, 2010 at 6:30pm — No Comments

दस्तक

मेरे दरवाजे पे दस्तक हुई,

मैंने अन्दर से ही पूछा,

आप कौन हो,

उत्तर मिला,

सुख समृद्धि,

झट से दरवाजा खोला,

अन्दर आइये उनसे बोला,

उनका जबाब था,

मैं हमेशा से उनके साथ रहता हूँ,

जो प्यार से मिल कर रहते हैं,

जहा भी मेल मिलाप रहेगा,

वहाँ मैं दस्तक देता रहूँगा,



एक दिन घर में हो गया,

अपनों में झगड़ा,

बिना मतलब का,

बाते बढ़ी,

कोई भी किसी काम में,

विचार लेना देना छोड़ दिया,

घर को विपत्ति के रूप में,

कलह जकड़… Continue

Added by Rash Bihari Ravi on November 3, 2010 at 12:30pm — 3 Comments

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