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Gumnaam pithoragarhi's Blog – December 2014 Archive (6)

ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,, गुमनाम पिथौरागढ़ी

2122

ज़िन्दगी है

बोझ सी है

इश्क तो अब

ख़ुदकुशी है

इक ग़ज़ल सी

तू हँसी है

अब ग़मों से

दोस्ती है

बुलबुले सी

ये ख़ुशी है

आफतों से

दोस्ती है

इक पहेली

ज़िन्दगी है

शोर गुमनाम

दिल में भी है

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Added by gumnaam pithoragarhi on December 26, 2014 at 8:22am — 12 Comments

ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,, गुमनाम पिथौरागढ़ी

२१२२  २१२२ २१२

तुमने पुरखों की हवेली बेच दी

शान दुःख सुख की सहेली बेच दी

भूख दौलत की मिटाने के लिए

मौत को दुल्हन नवेली बेच दी

जिस्म के बाजार ऊंचे दाम थे

गाँव की राधा चमेली बेच दी

बस्ता बचपन और कागज़ छीनकर

तुमने बच्चों  की हथेली बेच दी

गाँव में दिखने लगा बाज़ार पन

प्यार सी वो गुड की भेली बेच दी

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Added by gumnaam pithoragarhi on December 22, 2014 at 5:57pm — 19 Comments

ग़ज़ल ................... गुमनाम पिथौरागढ़ी

१२२२  १२२२ १२

है उसकी याद बादल की तरह

भटकता हूँ मैं पागल की तरह

हवास व्यापार के नाले हैं यहाँ

मुहब्बत थी गंगाजल की तरह

ये जीवन हादसों का मलवा है

किसी बेवा के आँचल की तरह

हुई नाकाम कोशिश भूलने की

थी तेरी याद दल दल की तरह

है चुप का रूप गोया ताज हो

है उसकी बात कोयल की तरह

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Added by gumnaam pithoragarhi on December 19, 2014 at 2:51pm — 8 Comments

ग़ज़ल ---------------------- गुमनाम पिथौरागढ़ी

२२ २२  २२ २२/१२१

रंगों की नादानी देखो

तेरी करें गुलामी देखो

चाँद धनुक गुलशन और हूर

तेरी रचें जवानी देखो

पहले आम की नई बौरें

यौवन से अनजानी देखो

जोग लगा दे जोग छुड़ा दे

सूरत एक सुहानी देखो

शेख बिरहमन करने लगे

रब से बेईमानी देखो

तुझको पूजूं या प्यार करू

ये अजब परेशानी देखो

तोड़ो चुप्पी गुमनाम ज़रा

कहके प्रेम कहानी…

Continue

Added by gumnaam pithoragarhi on December 16, 2014 at 10:36am — 15 Comments

ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, गुमनाम पिथौरागढ़ी

२२  २२  २२  २२  २२  २२

कैलेण्डर के सवालों से सहम जाता हूँ मैं

ईद दीवाली को जब नज़र मिलाता हूँ मैं

परदों से घर का हाल भला  लगता है

परदों से घर की मुफलिसी छुपाता  हूँ मैं

जीवन और गणित का हिसाब यार खरा है

जब आंसूं जुड़ता है हँसी घटाता हूँ मैं

मैं था काफिला था और सफ़र लम्बा

मन्जिल तक जाते तनहा रह जाता हूँ मैं

कोई मुझसे भी पूछे तू क्या चाहे गुमनाम

है प्यास  प्यार की ,प्यासा रह जाता हूँ…

Continue

Added by gumnaam pithoragarhi on December 10, 2014 at 5:30pm — 16 Comments

ग़ज़ल ,,,,,,,,,,,,,,गुमनाम पिथौरागढ़ी

इश्क़ तो इश्क़ है फितूर नहीं

कौन है जो नशे में चूर नहीं



लक्ष्य कोई भी पा सकोगे तुम

हौसला हो तो लक्ष्य दूर नहीं



आके मिल मुझसे बात भी कर अब

दूर से ऐसे मुझको घूर नहीं



सब खुदा हो गए ये बाबा तो

संत जैसा किसी पे नूर नहीं



सिर्फ ममता मिलेगी आँचल में

माँ खुदा सी है कोई हूर नहीं



सब पुजारी हैं आज दौलत के

कोई तुलसी रहीम सूर नहीं



बेवजह रस्ता देख मत गुमनाम

तेरी तक़दीर में हुज़ूर नहीं



गुमनाम…

Continue

Added by gumnaam pithoragarhi on December 5, 2014 at 6:00pm — 13 Comments

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