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Manan Kumar singh's Blog – December 2015 Archive (7)

गजल

गजल

2122 212 2122 2122

था फलक निज का कभी हो गया अब हाशिया हूँ

रोशनी तब थी मिली खो गयी बस मैं जिया हूँ।1

ढूँढता तब से रहा मैं अरे मिल भी सकी कब?

वह पहेली हो रही अब इधर मैं मुँह सिया हूँ।2

आ गये कितने खिलाड़ी खला मैं उन भलों को

खाल घर की बेचते बोलते खुद काफ़िया हूँ।3

तब लड़ी मैंने लड़ाई थके बिन जय कही भी

दुश्मनों पर छक चढ़ा फिर छका कर जय किया हूँ।4

जल सपन अपने गये बस रही है आरजू यह

हर कली खिल सज चले अब नये मग क्या लिया हूँ?5

लूटते हो लाज तुम… Continue

Added by Manan Kumar singh on December 27, 2015 at 10:00pm — 2 Comments

गजल

2122 2112

आ रहा है साल नया

जा रहा है काल बचा।

तिक्त-मीठी बात रही

है सपन का जाल रचा।

अनसुनापन बोल रहा

लेख दुर्गम भाल खचा।

कर जतन मन डोल रहा

देख अब ढाढस न बचा।

थे चले उम्मीद लिये

दे गया गत साल गचा।

नाच आये थिर न हुए

मन कहा अब न नचा।

कह रहा है साल नवल

देख मेरी शान बचा।

लाज लुटती चूक गये

मैं सकूँ इसको न पचा।

चीर जोड़ो,गर न सको

बलि चढ़ो नर न लजा।

शांत रहने दे न मुझे

रक्त से दामन न सजा।

मच रही है… Continue

Added by Manan Kumar singh on December 24, 2015 at 11:30am — 6 Comments

गजल

2212 2122 2

हर बार तू खार पाता है

उसको जिता हार जाता है।

सपने दिखा वह चला जाता

सबकुछ मुआ मार जाता है।

आया छड़ी जो पिटा था वह

तुझपर हुकूमत चलाता है।

थाना नचा था रहा जिसको

वह अब तुझे ही नचाता है।

बस मत लिया फिर चला जाता

आता यहाँ कब भुलाता है।

बाँटा कभी,तू कभी कटता

मिल भी गया जब मिलाता है।

सोचा कभी हाथ रहता क्या?

हर बार कर तेरा कटाता है।

हर बार तू ही मरा दंगों में

झंडा उड़ा, तू बँटाता है।

आता मसीहा नया फ़रमा,

तू… Continue

Added by Manan Kumar singh on December 21, 2015 at 10:24am — 4 Comments

गजल

गजल
*****
चैन आना मुश्किल-सा लगा है
आज रिश्ता बोझिल-सा लगा है।
पैठ करतीं बातें तीर बनकर
अंग हर अपना दिल-सा लगा है।
दर्द अपना रख लो गाँठ कर अब
तंग दिल उसका सिल-सा लगा है।
तंज कसता वह तेरी वफ़ा पे
अब रहम उसका खिल-सा लगा है।
माँगते हो तुम खैरात उससे
वह तो' मुझको बेदिल-सा लगा है।
"मौलिक व अप्रकाशित"@मनन
खिल=घाव के मवाद कीअंतिम किश्त
सिल=पत्थर

Added by Manan Kumar singh on December 15, 2015 at 8:38am — 6 Comments

मन तुम भी-गजल(मनन)

2212 2212 2122 22 12

सबने कही अपनी कथा अब कहो मन तुम भी अभी,

कितनी रही व्यथा बता चुप न रो मन तुम भी अभी।

चलते रहे हो साथ मेरे चला हूँ जिस मग जहाँ

करता रहा हूँ बात मैं अब करो मन तुम भी अभी ।

राजा मुझे मन का कहा जँच गया था मुझको कहूँ

बहता रहा मन- मौज अब बह चलो मन तुम भी अभी ।

टूटे हुए सब ख्वाब मैंने बटोरे फिर फिर यहाँ

बिखरे सभी जितने बटे आ बटो मन तुम भी अभी ।

कितनी कलाएं साधता आ गया मैं हूँ अब यहाँ

सधता गया बस काल है अब कहो मन तुम भी… Continue

Added by Manan Kumar singh on December 6, 2015 at 9:02pm — 1 Comment

गजल(आ चलो)

गजल

2122 2122

**************************

मैं चलो सपने सजा दूँ

आ सुनो अब गीत गा दूँ।

जो पड़ीं सोयी जहन में

ख्वाहिशें फिर से जगा दूँ।

जो बुझी है आरजू अब

आ उसे जलना सिखा दूँ।

है पड़ी सूनी डगर अब

राग मीठा गुनगुना दूँ ।

चल अली सूनी गली का

साँस से रिश्ता लगा दूँ ।

रश्मियों से आरती कर

आ अभी पलकें बिछा दूँ।

छू गया कबका पवन मुख

बन हवा तुझको रिझा दूँ।

छा रहीं मुख पे घटायें

आ अभी फिरसे सजा दूँ।

ताप तेराअब शमन… Continue

Added by Manan Kumar singh on December 5, 2015 at 9:07am — 10 Comments

वक्त बनके आ गये हो टल जाओगे

2122 2122 2222
वक्त बनके आ गये हो टल जाओगे
गर्दिशें कर तो अभी ही ढल जाओगे।
बुझ रहे दीये अभी रोशन जो रफ्ता
रोशनी बख्शो नजर में पल जाओगे।
हम बिठा लेते नयन में भूलें सब कुछ
कर भला वरना नजर से चल जाओगे।
आग उर में ले चले तो रौशन कर मग
बेवजह बाँटो तपिश मत जल जाओगे।
छल गये हो बार कितनी पूछो खुद से
सच न हो एक बार फिर अब छल जाओगे।

.
मौलिक व अप्रकाशित@

Added by Manan Kumar singh on December 1, 2015 at 10:00am — 2 Comments

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