For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sushil Sarna's Blog (899)

ख़्वाब ... (क्षणिका )

ख़्वाब ... (क्षणिका )

तैरता रहा तुम्हारा अक्स
मेरे ख़्वाबों के प्याले में
माहताब बनकर
मैं निहारता रहा
अब्र में
बिखरता ख़्वाब
छलिया माहताब में

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on June 22, 2019 at 4:58pm — 6 Comments

कर्म आधारित दोहे :

कर्म आधारित दोहे :

अपने अपने नीड़ की, अपनी अपनी पीर।

हर बंदे के कर्म ही, हैं उसकी तकदीर।।

पाप पुण्य संसार में, हैं कर्मों के भोग।

सुख-दुख पाना जीव का ,मात्र नहीं संयोग।।

हर किसी के कर्म का, दाता रखे हिसाब।

देना होगा ईश को ,हर कर्म का जवाब।।

चाँदी सोना धन सभी, हैं जग में बेकार।

सद कर्मों से जीव का, होता बेड़ा पार।।

जग में आया छोड़कर, जब तू अपना धाम।

धन अर्जन के कर्म में, भूल गया तू…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 20, 2019 at 2:33pm — 10 Comments

ताप संताप दोहे :

ताप संताप दोहे :

सूरज अपने ताप का, देख जरा संताप।

हरियाली को दे दिया, जैसे तूने शाप।।

भानु रशिम कर रही, कैसा तांडव आज।

वसुधा की काया फटी,ठूंठ बने सरताज।।

वसुंधरा का हो गया, देखो कैसा रूप।

हरियाली को खा गई, भानु तेरी धूप।।

मेघो अपने रहम की, जरा करो बरसात।

अपनी बूंदों से हरो, धरती का संताप।।

तृषित धरा को दीजिये, इंद्रदेव वरदान।

हलधर लौटे खेत में, खूब उगाये धान।।

सुशील सरना…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 19, 2019 at 7:04pm — 8 Comments

औरत.....

औरत.....

जाने 

कितने चेहरे रखती है 

मुस्कराहट 

थक गई है 

दर्द के पैबंद सीते सीते 

ज़िंदगी 

हर रात 

कोई मुझे 

आसमाँ बना देता है 

हर सह्र 

मैं पाताल से गहरे अंधेरों में 

धकेल दी जाती हूँ 

उफ़्फ़ ! कितनी बेअदबी होती है 

मेरे जिस्म के…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 18, 2019 at 1:07pm — 1 Comment

गर्मी पर 5 दोहे ....

गर्मी पर 5 दोहे ....

लू में हर जन भोगता, अनचाहा संताप।

दुश्मन मेघों का बना,भानु किरण का ताप।।

मेघों से धरती कहे, कब बरसोगे तात।

प्यासी वसुधा मांगती, थोड़ी सी बरसात।।

जंगल सारे कट गए, कैसे हो बरसात।

तपती धरती पर लिखी, पर्यावरणी बात।।

धरती पर हर ताप का, भानु ताप सरताज।

गौर वर्ण पर हो गया, स्वेद कणों का राज।।

भानु अनल से तप रहे, धरती अंबर आज।

प्यासा जीवन हो गया, बारिश का मुहताज…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 6, 2019 at 7:00pm — 5 Comments

ईद ...

ईद ...

दीद आपकी ईद पर, है अनुपम सौगात।

ईद मुबारक कर गई , आज ईद की रात ।।

मेघों की चिलमन हटी, हुई चाँद की दीद।

भेद-भाव सब भूलकर, कहें मुबारक ईद।।

दीद आपकी दे गई, ईदी हमको आज।

धड़कन के बजने लगे, देखो दिल में साज ।।

अर्श पर्श पर आज है, ईद मिलन का राज ।

ईद मुबारक सब कहें , इक दूजे को आज ।।

तरस रही हैं दीद को,कब आएगी ईद।

आएगी जब ईद, तो कैसे होगी दीद।।

बिना आपके बे-मज़ा,…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 5, 2019 at 3:30pm — 3 Comments

ज़िंदगी ... तीन क्षणिकाएँ

ज़िंदगी ... तीन क्षणिकाएँ

मरती रही ज़िंदगी
ज़िंदा रही जब तक
अमर हो गई
फ्रेम में
कैद होने के बाद

..........................
जीती रही ज़िंदगी
ज़िंदा रही जब तक
मर गई
फ्रेम में
कैद होने से पहले

..........................

वाकिफ़ थी
अपने हश्र से
ज़िंदगी
फिर भी
मिट न सकी
जीने की लालसा
अवसान से पहले

.....................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on June 2, 2019 at 9:24pm — 4 Comments

चुप होना चाहता हूँ ....

चुप होना चाहता हूँ ....

नहीं नहीं

बहुत हुआ

अब मैं चुप रहना चाहता हूँ

अंधेरों सा खामोश रहना चाहता हूँ

अब मेरे पास

न तो विचार हैं

न किसी भी विचार को

अभिव्यक्त करने के लिए शब्द

पता नहीं

क्यों मैं चुप नहीं रह पाता

बावजूद ये जानते हुए भी

कि मेरे बोलने से कुछ नहीं बदलने वाला

मैं निरंतर बोले जा रहा हूँ

न जाने किसे और क्या क्या

मैं नहीं जानता

मेरा इस तरह से लगातार बोलना

किस हद तक ठीक है…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 31, 2019 at 12:00pm — 4 Comments

मर्म .....

मर्म .....

कितनी पहेलियाँ हैं
हथेलियों की
इन चंद रेखाओं में
पढ़ते हैं
लोग इनमें
जीवन की लम्बाई
साँसों की गिनती
भौतिक सुख सुविधा
दाम्पत्य सुख
औलाद
सब कुछ पढ़ते है
नहीं पढ़ते
तो
प्राण बिंदु का मर्म

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on May 30, 2019 at 3:04pm — 1 Comment

छंद सोरठा .......

छंद सोरठा .......

अपनेपन की गंध, अपनों में मिलती नहीं।

स्वार्थपूर्ण दुर्गन्ध,रिश्तों से उठने लगी।1।

प्रथम सुवासित भोर, प्रीत सुवासित कर गई।

मधुर मिलन का शोर, नैनों में होने लगा।2।

तृषित रहा शृंगार, बंजारी सी प्यास का।

धधक उठे अंगार,अवगुंठन में प्रीत के।3।

जागे मन में प्रीत, नैन मिलें जब नैन से ।

बने हार भी जीत, दो पल में सदियाँ मिटें।4।

वो पहली मनुहार, यौवन की दहलीज पर।

शरमीली सी हार,हर बंधन…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 29, 2019 at 1:23pm — No Comments

बुढ़ापा ...

बुढ़ापा ...

शैशव,बचपन ,जवानी
छूट जाती है
बहुत पीछे
जब आता है
बुढ़ापा
छूट जाता है
हर मुखौटा
हर आयु का
जब आता है
बुढ़ापा
बहुत लगती है
प्यास
बीते हुए दिनों की
तृषा की ओढ़नी में
तृप्ति की तलाश में
युगों के बिछोने पर
उड़ जाता है तोड़ कर
काया की प्राचीर को
अंत में
अनंत में
ये
पावन
बुढ़ापा


सुशील सरना
मौखिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on May 28, 2019 at 1:00pm — 2 Comments

विदाई से पहले : 4 क्षणिकाएं

विदाई से पहले : 4 क्षणिकाएं

क्या संभव है

अनंतता को प्राप्त करना

महाशून्य की संख्याओं को

विलग करते हुए

........................................

उड़ने की तमन्नाएँ

आशाओं के बवंडर के साथ

भेदती रही नीलांबर को

अपने कर्णभेदी

अश्रुहीन रुदन से

......................................

मैं चाहता था

तुम्हें चाँद तक पहुंचाना

अपनी बाहों के घेरे में घेरकर

गिर गया स्वप्न

फिसल कर

आँखों के फलक से

हकीकत के…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 27, 2019 at 11:44am — 4 Comments

रैन पर कुछ शृंगारिक दोहे :

रैन पर कुछ शृंगारिक दोहे :

अंतर्मन के रात को , उदित हुए जज़्बात।

नैन लजीले कह गए,शरमीली सी बात।1।
विभावरी से कह रहा, रजनीपति ये बात।

प्रीत झील में कौमुदी,स्वरित करे जज़्बात।2।
बिना पिया के हो गई, रैन अभागन आज।

ओजहीन जीवन लगे,द्रवित हुए सब राज़ ।3।…
Continue

Added by Sushil Sarna on May 24, 2019 at 4:00pm — No Comments

शृंगारिक दोहे :

शृंगारिक दोहे :



नैनों से बरखा बहे, जब से छूटा हाथ।

नींदें दुश्मन हो गईं, कब आओगे नाथ।1।

एक श्वास तुम साथ हो, एक श्वास तुम दूर।

कैसी है ये दिल्लगी, कुछ तो कहो हुज़ूर।2।

कातिल हसीन शोखियाँ, हैं आपकी हुजूर।

नज़र न कर बैठे कहीं , बहका हुआ कुसूर।3।

सावन की बौछार में, भीगा हुआ शबाब।

बहके रिंदों की कहीं, नीयत हो न ख़राब ।4।

तुम तो साजन रात के, तुम क्या जानो पीर।

भोर हुई तुम चल दिए, नैन बहाएँ…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 20, 2019 at 4:00pm — 8 Comments

मित्र पर चंद दोहे :

मित्र पर चंद दोहे :

अपने मन को जानिए, अपना सच्चा मित्र।

दिखलाता हर कर्म का, श्वेत श्याम हर चित्र।।

किसको अपना हम कहें, किसको जानें ग़ैर।

मृदु शब्दों की आड़ में, मित्र निकालें बैर।।

सुख में हर जन साथ है, दुख में दीनानाथ।

दुःख में जब सब छोड़ दें, नाथ थामते हाथ।।

जग में सच्चे मित्र की, नहीं रही पहचान ।

कदम कदम विश्वास का ,हो जाता अवसान।।

मन को रोगी कर दिया, मित्र दे गया घात।

थामो मेरा हाथ…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 9, 2019 at 6:00pm — 2 Comments

साँसों की बैसाखी :

साँसों की बैसाखी :

जोड़ता है

अनजाने रिश्ते

तोड़ता है

पहचाने रिश्ते

जाने और अनजाने में

जान से कीमती

मोबाइल

साँसों का पर्याय है

जीवन का अध्याय है

किसी की जीत है

किसी की मात है

न उदय का भान है

न अस्त का ज्ञान है

हाथों में जहान है

स्वयं से अनजान है

इंसान को चलाता

एक और इंसान है

मोबाइल

चुपके से हंसाता है

चुपके से रुलाता है

सन्देश आता है

सन्देश जाता है…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 9, 2019 at 12:55pm — 1 Comment

१. फुल स्टॉप .... ३ क्षणिकाएं

१. फुल स्टॉप .... ३ क्षणिकाएं

फुल स्टॉप

अर्थात

अंतिम बिंदु

अर्थात

जीवन रेखा का

जीवन बिंदु में विलय

अर्थात

समाहित हो गई

सूक्षम में

श्वास की लय

.......................

२. नो मोर ...

नो मोर

वन्स मोर

अंतिम छोर

उड़ गया पंछी

हर बंधन

पिंजरे के तोड़

.......................

३. रेखाएँ ....

रेखाएँ

हथेलियों की

मृत देह पर

जीवित देह सी रहीं

बस…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 7, 2019 at 7:41pm — 8 Comments

नैन पर चंद दोहे :

नैन पर चंद दोहे :

नैन नैन में हो गई, अंतर्मन की बात।

नैन गाँव को मिल गयी, सपनों की सौग़ात।।

रीत निभा कर प्रीत ने, दिल पर खाई चोट।

आँस न स्रावित हो सकी, थी पलकों की ओट।।( आँस=वेदना )

नैन झुके तो शर्म है, नैन उठें बेशर्म।

नैन जानते नैन के, कैसे होते कर्म।।

नैन बड़े बेशर्म हैं ,नैनों का क्या धर्म।

प्रीत सयानी जानती, प्रीत नैन का मर्म।।

नैन नैन को भेजते,अंतस के सन्देश

बिना दरस के नैन को, लगता ज्योँ…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 3, 2019 at 1:20pm — 6 Comments

हस्ताक्षर....एक क्षणिका....

हस्ताक्षर....एक क्षणिका....

स्वरित हो गए
नयन
अंतर्वेदना की वीचियों से
वाचाल हुए
कपोल पर
मूक प्रेम के
खारे
हस्ताक्षर

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशसित

Added by Sushil Sarna on May 1, 2019 at 8:11pm — 4 Comments

ये दिल.....

ये दिल..... 

फिर

धोखा दे गया

धड़क कर

ये दिल

वादा किया था

ख़ुद से

टुकड़े

ख़्वाबों के

न बीनूँगा मैं

सबा ने दी दस्तक

लम्स

यादों के

जिस्म से

सरगोशियाँ करने लगे

भूल गया

खुद से किया वादा

बेख़ुदी में

खा गया धोखा

किसी की करीबी का

भूल गया हर कसम दिल

डूब गया

सफ़ीना यादों का

बेवफ़ा

हो गया साहिल



लाख

पलकें बंद कीं

बुझा दिए चराग़

तारीकियों में…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 1, 2019 at 3:53pm — 8 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर

प्यादे : एक संख्या भरप्यादे— बेकसूर, बेख़बर, नियति और नीति से अनजान—अक्सर मान लिये जाते हैंमात्र एक…See More
2 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
10 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय , ग़ज़ल के दूसरे शेर       'ग़म-ए-दौलत मिली है किस्मत से…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"विषय मुक्त होने के कारण लघु कथा लिखने का प्रयास किया है , अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त…"
12 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही सारी…"
12 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी , सुझाव और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  चौपाई विधान में 121…"
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  चौपाई की मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार । चौपाई विधान में…"
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"शब्द बाण…"
13 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी, रचना/छंदों पर अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।  //तोतपुरी ... टंकण…"
21 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल को इतना समय देने के लिए, शेर-दर-शेर और पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तार देने के लिए और अमूल्य…"
21 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय,  आपका कोटिश: धन्यवाद कि आपने विस्तृत मार्ग दर्शन कर ग़ज़ल की बारीकियाँ को समझाया !"
21 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय नमस्कार, आपने  अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी बहुत शुक्रिया। ग़म-ए-दौलत से मेरा इशारा भी…"
23 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service