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Maharshi tripathi's Blog (23)

बड़ी सीख (लघुकथा )

"यार मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ "-सुजीत ने अपने दोस्त विपिन से कहा |

"प्यार, यार आजकल तो प्यार का ज़माना कहाँ हैं,बस मजे ले और उसे छोड़ दे"-विपिन ने उसे समझाते हुए कहा | 

"पर ,यार  मैं उस से प्यार करता हूँ,मैं किसी के साथ धोका नही कर सकता हूँ "-सुजीत ने उदास होते हुए कहा | विपिन -"यार  इसी में तो मजा है ,खैर कौन है वो लड़की मैं भी तो जानूँ "

सुजीत-"तेरी बहन ,यार "

इतना सुन कर विपिन कुछ न बोल सका | उसे एक बड़ी सीख मिल चुकी थी |

"मौलिक व…

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Added by maharshi tripathi on November 26, 2014 at 6:05pm — 13 Comments

हमे भी इन सितारों में एक जगह बनानी है

जिसने दिया हमें आदर्श शिष्य की पहचान 

गुरु को दे अंगूठा जब एकलव्य बने महान 

हो लगन कुछ सीखने की इनसे सीखे हम

जग को हिला सकते नहीं किसी से पीछे हम

गुरु-शिष्य की फिर वही परम्परा जगानी है   

हमे भी इन सितारों  में एक जगह बनानी है |

अपने प्राणों  की आहुति देकर जो चले गये 

इन्कलाब का नारा दे ,गोली खाकर जो चले गये 

स्वतंत्रता -गणतन्त्र दिवस पाठशाला तक सिमट गये 

जिनके हाथों में बागडोर वो मधुशाला तक सिमट गये 

जो भूल गये…

Continue

Added by maharshi tripathi on November 23, 2014 at 6:55pm — 7 Comments

तो फिर बात ही क्या थी

सफ़र तय किये हमने मोहब्बत में साथ चलकर

इश्क़ में बुने सपने तुम्हारे साथ जो मिलकर

हकीक़त हो गये होते ,तो फिर बात ही क्या थी

होते तुम हमारे साथ ,तो फिर बात ही क्या थी |



राह कांटों भरी मोहब्बत की फिर भी चल दिए हम तुम

मिले जो दर्द ज़माने से उसे भी सह लिए हम तुम

जहाँ देता न ये दर्द ,तो फिर बात ही क्या थी

होते तुम हमारे साथ ,तो फिर बात ही क्या थी |



तेरे ख्वाबों का वस्त्र धारण कर लिया मैंने

तेरी चाहत रूपी शस्त्र धारण कर लिया मैंने

स्वीकृत… Continue

Added by maharshi tripathi on November 7, 2014 at 9:27pm — 8 Comments

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