For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manoj kumar Ahsaas's Blog – August 2015 Archive (2)

ग़ज़ल इस्लाह के लिए (मनोज कुमार अहसास)

2122 2122 2122 212



लड़खड़ाहट चाहता हूँ मैं संभल जाने के बाद

धूप दिल में चुभ रही है दिन निकल जाने के बाद



सबसे पहला शेर था मैं एक ग़ज़ल की सोच का

और खारिज हो गया था लय बदल जाने के बाद



ठोस उस आधार पर लिपटी थी इक चिकनी परत

खुद से शिकवा कर रहे है हम फिसल जाने के बाद



खुश्क आँखों की ज़ुबा को यूँ समझ लो तुम सनम

ख़ाली बरतन जल रहा है सब उबल जाने के बाद



सर छुपाये फिर रहा था रौशनी में दर-ब-दर

चाँद सा खिलने लगा गम शाम ढल जाने के…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on August 13, 2015 at 9:30pm — 15 Comments

तेरी बातें (कविता)____मनोज कुमार अहसास

पढ़ा है दर्द की आँखों में तराना तेरा

तुझको मालूम हो शायद मेरा बेरंग सफ़र

मैंने हर लम्हा तेरी याद को पेशानी दी

तुझपे कुर्बान रही मेरी अकीदत की नज़र





मैं सुलगता हूँ तेरा साथ निभाने के लिए

हलाकि कुछ भी नही बाकि है जलने को इधर

ख़त्म हो चुकी इक रस्म की सांसो के लिए

ज़बी हर लम्हा ढूंढती है तेरी रहगुजर





तुझको पा लेना किसी हाल में मुमकिन ही न था

तुझको खोने की तमन्नाये उठी पर कैसे

जब थे मजबूर किसी बात की परवाह न थी

आज इन जमते हुए… Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on August 9, 2015 at 10:39pm — 12 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"धरोहर 'विचारा लख्खाराम को मौत के मुंह में उसकी बीमारी से ज्यादा कर्ज के बोझ की चिंता ने ढकेल…"
30 minutes ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी अंक-६० में आप सभी का हार्दिक स्वागत है."
43 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर' साहिब, मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने नाचीज़ की सलाह पर ग़ौर किया।…"
1 hour ago
श्याम मोहन पाराशर(मोहन संप्रास) updated their profile
2 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " left a comment for श्याम मोहन पाराशर(मोहन संप्रास)
"जनाब श्याम मोहन पराशर (मोहन संप्रास) जी, ओ बी ओ पर आपका हार्दिक स्वागत करते हैं।"
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post क्या टूट चुका दिल है जो वो दिल न रहेगा ?(७१)
"भाई Salik Ganvir  जी आदाब और उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया "
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?(७७ )
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद'  साहेब , आदाब , आपकी हौसला आफ़जाई और त्रुटियों की तरफ…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ग़ज़ल
"ब हुज़ूर आ़ली जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब आदाब। हक़ीर की ग़ज़ल पर आपकी पहुंच, इतना वक्त…"
2 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तड़प उनकी भी चाहत की इधर जैसी उधर भी क्या ?(७७ )
"जनाब अमीरुद्दीन खा़न "अमीर साहेब , आदाब, आपकी हौसला आफ़जाई के लिए शुक्रगुज़ार हूँ , आपकी इस्लाह…"
2 hours ago
श्याम मोहन पाराशर(मोहन संप्रास) is now a member of Open Books Online
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर' साहिब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने तरही मिस्रे पर, नाचीज़ आपको दाद…"
4 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service