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Manan Kumar singh's Blog – November 2018 Archive (1)

गजल(जैसे तैसे बात बनी है...)

22  22  22 22

जैसे-तैसे बात बनी है

रमई चादर हाथ लगी है।1

मंदिर-मंदिर घूम रहा मैं

चमचा-चमचा आस पली है।2

'बबुआ काम करेगा बढ़कर',

'दादाओं' ने बात कही है।3

'मम्मी' का मैं राजदुलारा

लगता, 'पगड़ी' माथ चढ़ी है।4

अपनी कुर्सी पर बैठा 'वह'

दिल में कितनी बात खली है!5

साँझ-सबेरे ईश-विनय कर

'राम-रमा' में प्रीत जगी है।6

रंगे आज सियार बहुत हैं

मुझपर सबकी आँख लगी है।7

चोट…

Continue

Added by Manan Kumar singh on November 11, 2018 at 11:08am — 6 Comments

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