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ज़िन्दगी गर मुझको तेरी आरज़ू होती नहीं(ग़ज़ल)

2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी गर मुझको तेरी आरज़ू होती नहीं
अपनी सांसों से मेरी फिर गुफ़्तगू होती नहीं

गर तड़प होती न मेरे दिल में तुझको पाने की
मेरी आँखों में, मेरे ख्वाबों में तू होती नहीं

उम्र गुज़री है यहाँ तक के सफ़र में, दोस्तो!
पर ये वो मंज़िल है, जिसकी जुस्तजू होती नहीं

ये जहाँ गिनता है बस कुर्बानियों की दास्ताँ
जाँ लुटाये बिन मुहब्बत सुर्ख-रू होती नहीं

दोस्तों के दिल मुनव्वर जो नहीं होते 'शकूर'
रौशनी भी यूँ फ़राहम कू-ब-कू होती नहीं

मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 17, 2020 at 1:21pm

आदरणीय रूपम कुमार जी हौसलाअफ्ज़ाई के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 17, 2020 at 1:21pm

आपका तहेदिल से शुक्रिया मोहतरम अमीरुद्दीन अमीर साहिब

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 16, 2020 at 12:07am

जनाब शिज्जु 'शकूर' साहिब आदाब, उम्दा ग़ज़ल कही है आपने दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 14, 2020 at 1:11pm

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा सर आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 14, 2020 at 1:11pm

आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आपका तहेदिल से शुक्रिया, प्रयास रहेगा कि दोबारा सक्रियता के साथ हिस्सा बनूं, 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 14, 2020 at 1:09pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया, कोशिश करूंगा कि नियमित रह सकूं।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 13, 2020 at 9:25pm

आदरणीय शिज्जू शकूर जी सादर नमस्कार, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें 

Comment by नाथ सोनांचली on July 13, 2020 at 6:56pm

आद0 शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन। लम्बे अंतराल के बाद पटल पर आपको देख रहा हूँ। बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार करें। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 13, 2020 at 3:18pm

आ. भाई शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन । एक अच्छी गजल के साथ लम्बे अंतराल बाद ओबीओ पर आपकी उपस्थिति से मन हर्षित हुआ । आशा है अब नियमित बने रहेंगे । फिलहाल इस प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई ।

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