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देह पर कुछ दोहे, ,,,,,,

देह पर कुछ दोहे, ,,,,,,

देह धरा में खो गई, शून्य हुए सम्बंध ।
तस्वीरों में रह गई, रिश्तों की बस गंध ।।


देह मिटी तो मिट गए, भौतिक जग के दंश ।
शेष पवन में रह गए, कुछ यादों के अंश ।।


देह छोड़ के उड़ चला ,श्वास पंख का हंस ।
काल न छोड़े जीव को ,होता काल नृशंस ।।


आती -जाती देह में , सांसे हैं आभास ।
एक श्वास का भी नहीं, जीवन में विश्वास ।।


देह दास है श्वास की, श्वास देह की प्यास ।
श्वास देह की जिंदगी, श्वास देह की आस ।।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on September 11, 2020 at 8:03pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'   जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभारी

Comment by Sushil Sarna on September 11, 2020 at 8:02pm

आदरणीय आशीष यादव  जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभारी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 11, 2020 at 5:40pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

Comment by आशीष यादव on September 10, 2020 at 10:36pm

बहुत ही अच्छे दोहों का सृजन हुआ है। आदरणीय श्री सुशील सरना जी को बहुत बहुत बधाई। 

Comment by Sushil Sarna on September 8, 2020 at 12:24pm
आदरणीय समर कबीर जी, आदाब, सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार सर
Comment by Samar kabeer on September 7, 2020 at 7:50pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on September 6, 2020 at 10:28pm
आदरणीय दयाराम जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभारी
Comment by Dayaram Methani on September 5, 2020 at 9:46pm

आदरणीय सुशील सरना जी, देह पर सुंदर दोहों के सृजन पर हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on September 5, 2020 at 6:32pm
आदरणीया जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार
Comment by Dimple Sharma on September 5, 2020 at 3:53am

आदरणीय सुशील शर्मा जी नमस्ते, सभी दोहे कमाल है पर मुझे तीसरा दोहा विशेष पसंद आया आदरणीय बधाई स्वीकार करें।

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