For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ दोहे.
१- संस्कारित माँ-बाप की,मिलती जिनको सीख.
   नहीं  मांगते  चंदा  वो,  नहीं   मांगते   भीख.
**
२- बांध सकी ना डोर से,कभी न कोई प्रीत.
    आया है तो जायेगा,जीवन की ये रीत.
**
३- लय  से ही संसार है, लय का  नाम  ह्रदय.
    लय का छूटा साथ जो, लय के बिना प्रलय.
**
अविनाश बागडे...नागपुर.

Views: 543

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 7, 2012 at 11:49pm

संस्कारित माँ-बाप की,मिलती जिनको सीख.

 नहीं  मांगते  चंदा  वो,  नहीं   मांगते   भीख.
बिलकुल सत्य और सटीक .आइये संस्कार का दामन घर से पकडायें   बच्चों को ..बधाई 
भ्रमर 5

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 5, 2012 at 10:18pm

बाँधा दोहे तीन ही, पग ज्यों लाँघे तीन
हृदय मुग्ध उद्वेलता, मन की लहरी बीन.. .

भाई अविनाश जी, आपको सादर बधाइयाँ !


Comment by AVINASH S BAGDE on April 3, 2012 at 7:30pm

आदरणीय अविनाश जी,अनुपम दोहे भ्रात|

छन्दबद्ध वाणी मधुर,पुलकित है मम गात||...dil ko chhoo gai ye bat 'mayank' ji.

Comment by AVINASH S BAGDE on April 3, 2012 at 7:17pm

sabhi shubh-cintako....Rajesh kumari mam,Minu jha mam,Ravindra Nath Shahi sir, Sandeep Dwivedi, "Wahid Kashiwasi ' ji,आशीष यादव ji, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA sir ji,aur मनोज कुमार सिंह 'मयंक' ji...ka hriday se aabhar.

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on April 3, 2012 at 2:16pm

आदरणीय अविनाश जी,अनुपम दोहे भ्रात|

छन्दबद्ध वाणी मधुर,पुलकित है मम गात||

आभार और बधाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 3, 2012 at 1:36pm

adarniya avinash ji sadar abhivadan, bahut kuch kah diya itne kam shabdon main badhai.

ek anurodh hai ki meri post valvale par main sabhi sathiyon se nivedan kar chuka hoon ki ye rachna kya hai, tukbandi to mere samjh se hai, log mujhse poonchte hain ki ye kya likha. bada gadbad dikh raha hai, aap bhi dekhiye kya hai. agar kuch avishkar hua hai to patent kara loon.

Comment by आशीष यादव on April 3, 2012 at 1:16pm

बहुत ही अच्छे दोहे है|

मेरी बधाई स्वीकार करें|
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 3, 2012 at 12:51pm

बहुत ही सार्थक सुन्दर दोहे आदरणीय अविनाश जी!

Comment by minu jha on April 3, 2012 at 11:42am

जीवन की सच्चाई बयान करते दोहे अविनाश जी,बहुत सुंदर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 3, 2012 at 11:30am

अविनाश जी बहुत उत्तम दोहे रचे हैं तीसरे दोहे की तो बात ही क्या है अविनाश जी पहले दोहे में संस्कारित की जगह सुसंस्कृत माँ -बाप की करके देखें तो मेरे विचार से सही रहेगा अर्थ दोनों के सामान ही हैं पर शब्द सज्जा और पैमाने के द्रष्टि कोण  से  विचार प्रकट कर रही हूँ | 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Apr 19
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service